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डेढ़ माह में पिछले अग्निकाल से आठ गुना ज्यादा घटनाएं

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बागेश्वर में जंगलों में लगी आग के कारण छाई धुंध। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जंगलों में आग लगने से बागेश्वर जिला धुंध की चपेट में है। धुंध के कारण आसपास की पहाड़ियां तक नहीं दिखाई दे रही हैं। इस अग्निकाल में 15 फरवरी से अब तक जंगलों में आग लगने की 32 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 40.60 हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हुआ है। पिछले फायर सीजन में आग की मात्र चार घटनाएं हुईं थीं।
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जिला मुख्यालय के जंगल तक आग से धधक रहे हैं। कलक्ट्रेट के पास के जंगल में कई बार आग लग चुकी है। जिला मुख्यालय के चंडिका मंदिर के समीप का जंगल भी आग की चपेट में आ चुका है। लगातार जल रहे जंगलों से पेड़, पौधों के साथ ही बहुमूल्य वनस्पति को खासा नुकसान पहुंच रहा है।
बात पिछले अग्निकाल की करें तो पूरे सीजन में जंगल में आग लगने की केवल चार घटनाएं हुई, जिससे 5.25 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। हालांकि शीतकाल में जंगलों में आग लगने की 51 घटनाएं हुुईं, जिनसे 73.94 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ।
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इस अग्निकाल में वनों को आग से बचाने के लिए जिले में 29 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। प्रत्येक क्रू स्टेशन में चार कर्मचारियों की तैनाती वन विभाग ने की है। प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही का कहना है कि जंगलों की आग पर बराबर नजर रखी जा रही है। जहां कहीं जंगलों में आग लग रही है, तत्काल बुझाया जा रहा है।
बुधवार को धधका पचार का जंगल
बागेश्वर। बुधवार को धरमघर रेंज के पचार के जंगल में आग लग गई। सुबह करीब 11 बजे जंगल में आग लगी। आग लगने की जानकारी मिलते ही ग्रामीण जंगल में पहुंच गए। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद करीब दो घंटे में आग पर काबू पाया। इस दौरान वनस्पति को खासा नुकसान पहुंचा।
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