बागेश्वर। सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। कपकोट के राजकीय इंटर कॉलेज की स्थिति अधिक दयनीय है। विद्यालय में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं हैं।
प्रधानाचार्य का प्रभार देने के लिए दूसरे विद्यालय से एक स्थायी शिक्षक को संबंद्ध किया गया है। स्कूल में आठ विषयों को पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। बाकी विषयों का शिक्षण कार्य अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रहा है।
राइंका बघर तीन गांवों के बीच का एकमात्र इंटर कॉलेज है। बघर, ढोक्टीगांव और दोबाड़ गांवों में स्थित छह प्राथमिक स्कूलों से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थी यहां पढ़ने आते हैं। वर्तमान में विद्यालय की छात्र संख्या 153 है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विद्यालय में समाज शास्त्र, रसायन विज्ञान, इतिहास, राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता और हिंदी, गणित, संस्कृत और सामान्य विषयों को पढ़ाने के लिए अतिथि शिक्षक भी तैनात नहीं हैं। एकमात्र स्थायी शिक्षक को राइंका कर्मी से यहां संबंद्ध किया गया है।
पीटीए अध्यक्ष नंदन सिंह रावत, सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र बिष्ट, प्रवीण सिंह, उदे सिंह, महिपाल सिंह, खीम सिंह आदि ने बताया कि शिक्षकों की कमी की समस्या को शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, विधायक और शिक्षा मंत्री के सामने भी उठाया जा चुका है।
अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए लोग कपकोट और बागेश्वर की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।