महान छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत ने जिन बांज के पेड़ों पर काव्य रचना की आज उन्हीं बांज के जंगल को कचराघर बनाया जा रहा है। हालात यह हैं कि कूड़े के कारण जहां बांज के जंगल को खतरा पैदा हो रहा है वहीं पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। इतना ही नहीं कुछ लोग बांज के जंगल में मिट्टी डालकर पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसको लेकर क्षेत्र की जनता में गहरी नाराजगी है।
सरपंच चंदन सिंह दोसाद ने बताया कि कौसानी के छानी ल्वेशाल की वन पंचायत के बांज के जंगलों को कूड़ा डालकर बरबाद किया जा रहा है। कौसानी में यह समस्या दो जिलों में होने के कारण पैदा हो रही है। उनका कहना है कि ग्रामीणों के मवेशी इस कूड़े को खाकर बीमार हो रहे हैं।
महिला मंगल दल की अध्यक्षा गंगा देवी का कहना है कि निर्माण कार्य की मिट्टी बांज के जंगलों में डाली जा रही है। छोटे पौधे दबकर नष्ट हो चुके हैं। बड़े पेड़ सूख रहे हैं। यदि वन पंचायत की भूमि में मिट्टी व कूड़ा डालना बंद नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन छेड़ेंगे।
पूर्व प्रमुख पान सिंह दोसाद का कहना है कि गांधी जी की शिष्या सरला बहन का इस बांज के जंगल से बेहद लगाव था। महान कवि सुमित्रा नंदन पंत ने भी बांज के जंगल का वर्णन अपनी कविताओं में किया है। परंतु आज प्रशासन इस जंगल की सुरक्षा पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा है।
पूर्व प्रधानाचार्य फकीर सिंह दोसाद का कहना है कि जिन ग्रामीणों ने इन वनों को दशकों से पाल-पोसकर बड़ा किया है वह ग्रामीण भी इन वनों से साल में एक बार सूखी लकड़ी और खाद के लिए बांज की सूखी पत्तियों को ही लाते हैं। यदि इसी तरह कूड़ा डाला गया तो बांज के वनों को काफी नुकसान होगा।