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कुशाग्र बुद्धि के धनी हैं डा कांडपाल

Mon, 07 Sep 2015 12:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ बागेश्वर।
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शैलेश मटियानी राज्य शिक्षक उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित डायट में प्रवक्ता पद पर कार्यरत डा केवलानंद कांडपाल बचपन से ही मेधावी रहे हैं। उन्हें मिले इस पुरस्कार से शिक्षकों में खुशी का माहौल है।
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खुनौली गांव निवासी स्व परमानंद कांडपाल और मोहनी देवी के घर 29 जनवरी 1966 को  जन्मे डा केवलानंद कांडपाल बचपन से कुशाग्र बुद्धि के धनी रहे हैं। उन्होंने प्राइमरी शिक्षा गांव की पाठशाला से ग्रहण की।

1980 में हाईस्कूल, 1982 में इंटर की परीक्षा, 1984 बी कॉम और 1986 में एम कॉम सभी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। 1990 से 2006 तक राजकीय इंटर कालेज गोपेश्वर चमोली में प्रवक्ता पद कार्यरत रहे।
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वहां उन्होंने प्रवक्ता पद पर रहते हुए इंटर में वाणिज्य विषय में बेहतरीन परीक्षाफल दिया। 2006 से वह यहां डायट में प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं।

सेवाकाल के दौरान उन्होंने 2002 में वाणिज्य में डी फिल, 1998 में एलएलबी और 2014 में एलएलएम की उपाधि प्राप्त की। उन्हें लेखन में काफी रुचि रही है।

उनके राष्ट्रीय स्तर की शैक्षिक संदर्भ पत्रिकाओं में लगातार लेख प्रकाशित होते आ रहे हैं। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग भारत सरकार डीओपीटी के राष्ट्रीय संदर्भदाता के रूप में देश के उच्च प्रशिक्षण संस्थानों में निरंतर प्रशिक्षण प्रदान करते आ रहे हैं।

डा कांडपाल के निर्देशन में  डायट में एक समेकित शिक्षा संसाधन केंद्र विकसित किया गया है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए इससे सहायता मिल रही है।

वह नियोजन और प्रबंधन विभाग के मुखिया के रूप में डायट एवं जिले के अध्यापकों के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षणों का सफलतापूर्वक संचालन करते आ रहे हैं।

उनकी पत्नी ममता कांडपाल चमोली जिले के कर्णप्रयाग में उच्च प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका हैं। उनकी बेटी नेहा स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा जबकि पुत्र आशुतोष 12वीं की पढ़ाई कर रहा है।
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