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पर्यटन कार्यालय नहीं होने से विकास पर ब्रेक लगा

Fri, 24 Feb 2017 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
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। नव सृजित तहसीलों में पर्यटन का खजाना भरा पड़ा है। विडंबना है कि इन तहसीलों में पर्यटन विभाग के अपने कार्यालय ही नहीं हैं। कार्यालय नहीं होने से क्षेत्र के पर्यटन विकास पर ब्रेक सा लगा हुआ है। क्षेत्र के लोगों को विभागीय जानकारी लेने के लिए 15 से 60 किमी दूर जिला मुख्यालय आना पड़ता है। इसमें उनका काफी समय और पैसा बर्बाद हो रहा है। क्षेत्र के लोगों ने शासन से नव सृजित तहसीलों में शीघ्र पर्यटन विभाग के कार्यालय खोलने की मांग की है। 

मालूम हो कि कपकोट, गरुड़, कांडा, दुग नाकुरी और काफलीगैर जिले की नव सृजित तहसीलें हैं। इन तहसीलों में पर्यटन के खजाने भरे पड़े हैं। कौसानी स्थित पर्यटन विभाग का कार्यालय तो भगवान भरोसे छोड़ा हुआ है।  पर्यटन क्षेत्रों की अनदेखी और वहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने के कारण सीजन में देश विदेश से आने वाले सैलानियों को कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। कपकोट तहसील के उत्तर भाग में विश्व प्रसिद्ध पिंडारी, सुंदरढुंगा और कफनी ग्लेशियर हैं।
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इसके अलावा वहां कई अन्य दर्शनीय स्थल हैं। दुग नाकुुरी तहसील में सनगाड़ और पचार में धोबी नौलिंग देवता समेत कई अन्य दर्शनीय स्थल हैं। काफलीगैर तहसील के पौड़ीधार से हिमालय की लंबी श्रृंखला जबकि जोशी गांव से पंचाचूली के दर्शन होते हैं। रैंखोली से कई मनोरम पहाड़ियां नजर आती हैं, लेकिन इन स्थलों पर पर्यटन की दृष्टि से कुछ भी नहीं हुआ है। 


इसी तरह गरुड़ तहसील के प्रवेश द्वार पर पहाड़ों की रानी कौसानी है। बैजनाथ धाम और कोट भ्रामरी मंदिर समेत कई अन्य दर्शनीय स्थल हैं,  जिनके विकास के लिए अभी काफी कुछ होना बांकी हैं। उत्तराखंड राज्य कल्याणकारी संगठन के जिलाध्यक्ष पूरन चंद्र पाठक का कहना है कि नव सृजित तहसीलों में पर्यटन विभाग के अपने कार्यालय होते तो इससे पर्यटन विकास को नए आयाम मिलते। अलग राज्य बनने पर लोगों को आशा थी कि यहां बनने वाली सरकारें इस दिशा में ठोस काम करेंगी। लेकिन अभी तक नतीजा शून्य ही रहा है।
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 जिला पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट ने कहा कि शासन से नई तहसीलों में फिलहाल पर्यटन कार्यालय खोलने के कोई निर्देश प्राप्त नहीं हैं। शासन जब भी इनमें पर्यटन कार्यालय खोलने के प्रस्ताव मांगेगा तुरंत भेज दिया जाएगा।
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