पीएमजीएसवाई के तहत 2007 में निर्मित चीराबगड़-पोथिंग सड़क की हालत बदतर हो गई है। सात किमी लंबी इस सड़क के डेढ़ किमी दूरी तक ही वाहन ठीकठाक से आ-जा पा रहे हैं। इसके बाद तो चालकों को वाहन जान हथेली पर रखकर चलाने पड़ रहे हैं। सड़क में वर्षों पूर्व किए गए डामर केे जगह-जगह उखड़ने से उसमें में दो से पांच मीटर लंबाई तक के गड्ढे हो गए हैं। ग्रामीणों ने पीएमजीएसवाई के अभियंताओं से सड़क की सेहत ठीक करने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा है।
पोथिंग गांव की करीब दो हजार की आबादी को यातायात की सुविधा देने के लिए बनी चीराबगड़-पोथिंग सड़क की हालत काफी खराब हो गई है। सड़क के किनारे कई जगह टूट गए हैं। जगह-जगह डामर उखड़ चुुका है। बरसात के पानी के निकास के लिए नाली भी नहीं बनी है। अनेेकों जगह सड़क काफी संकरी भी। इससे वाहनों को एक दूसरे से पास लेने में भी परेशानी हो रही है। इसी मार्ग से होकर श्रद्धालु आदिशक्ति भगवती माता के मंदिर के दर्शनों को जाते हैं। सड़क पर रोजाना छोटे-बड़े वाहनों का आना-जाना रहता है। इसके अलावा गांव के बच्चे राइंका कपकोट और डिग्री कालेज को जाते हैं।
गत दिनों विधानसभा चुनाव में अपना मत डालने आए प्रवासी विनोद गढ़िया सड़क की हालत देख काफी दु:खी हैं। कहा कि देश में बुलेट ट्रेन चलाने और पहाड़ों में बारहमासी सड़क बनाने की बात हो रही है, वहीं उनके गांव जैसे राज्य के कई अन्य गांवों को जोड़ने वाली सड़कें जानलेवा साबित हो रही हैं। सड़कों में वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी जोखिमभरा है।