महिला सशक्तिकरण के तमाम दावों के बावजूद पुंगरघाटी की करीब 35 हजार महिलाओं के लिए महिला डॉक्टर नहीं है। इस कारण महिलाओं को इलाज के लिए 10 से 65 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। महिला डॉक्टर नहीं होने से प्रसव पीड़िताओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों ने अस्पतालों में महिला डॉक्टरों की तैनाती की कई बार मांग की है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। आक्रोशित क्षेत्रवासियों ने अब डॉक्टरों की शीघ्र तैनाती न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
तुपेड़ ग्राम पंचायत से लेकर सनगाड़ गांव तक के इलाके को पुंगर वार और पुंगर पार की घाटी कहा जाता है। इस घाटी में 65 से अधिक ग्राम पंचायतें आती हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार क्षेत्र की आबादी 70 हजार से भी अधिक है। इसमें से आधी से अधिक आबादी महिलाओं की है।
खड़िया बाहुल्य यह क्षेत्र विकास की दृष्टि से काफी पिछड़ा है। क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दोफाड़, उद्यमस्थल, बनलेख, स्यांकोट में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जबकि चौंरा में राजकीय ऐलोपैथिक चिकित्सालय स्थापित हैं।
लेकिन इन अस्पतालों में महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं होने से महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इधर, पुंगरघाटी विकास मंच के प्रवक्ता हरीश कालाकोटी और पुंगरघाटी कृषक कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह रौतेला ने बताया कि उन्होंने क्षेत्र के अस्पतालों में महिला डॉक्टरों की तैनाती की मांग कई बार की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने जल्द ही महिला डॉक्टरों की तैनाती न होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
शासन से शीघ्र ही एक महिला चिकित्सक आने वाली हैं। उन्हें क्षेत्र के किसी एक अस्पताल में नियुक्त किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वहां उनसे शिविर करवाया जाएगा। इससे क्षेत्र की महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं मिला करेंगी। शासन से जैसे ही अन्य डॉक्टर मिलेंगे उन्हें आवश्यकतानुसार तैनात करने के प्रयास किए जाएंगे। - डॉ. शैलजा भट्ट, मुख्य चिकित्साधिकारी।