जिला योजना ऐसा उपकरण है जिससे हम हर गांव का विकास स्वयं कर सकते है। इसके लिए ग्राम स्तर से कार्ययोजना तैयार करनी होगी, ताकि ग्रामीणों की मूलभूत समस्याएं जिला योजना से जुड़ सकें। यह बात जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने जिला योजना,राज्य सेक्टर, केन्द्र पोषित, वाह्य सहायतित एवं बीस सूत्रीय कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने जल निगम सहित अन्य विभागों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए मार्च प्रथम सप्ताह तक तेजी लाने को कहा।
उन्होंने कार्यों की गुणवत्ता के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जिस विभाग के पास ज्यादा कार्य है उनके कार्यों के भौतिक सत्यापन के लिए टास्क फोर्स टीमें बढ़ाने के लिए जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी को निर्देश दिए। विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए किसी के दबाव में न आकर नियमानुसार कार्य करने को कहा। जिला योजना की समीक्षा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2016-17 में जिला योजना अंतर्गत अनुमोदित परिव्यय धनराशि 5069 लाख के सापेक्ष 2783.20 लाख धनराशि अवमुक्त हुई है। इसके सापेक्ष 2102.47 लाख धनराशि व्यय हो चुकी है जो अवमुक्त के सापेक्ष 75.54 प्रतिशत है।
राज्य सेक्टर में अनुमोदित परिव्यय 9703.98 लाख के सापेक्ष अवमुक्त धनराशि 9703.98 लाख धनराशि के सापेक्ष 7671.01 लाख व्यय हो चुकी है जो अवमुक्त धनराशि का 79.05 प्रतिशत है। इसी प्रकार केंद्र पोषित योजना में धनराशि 11390.10 लाख अनुमोदित परिव्यय के सापेक्ष धनराशि 10412.71 लाख व्यय हो चुकी है जो अवमुक्त धनराशि का 91.42 प्रतिशत है।
वाह्य सहायतित योजना के अंतर्गत अनुमोदित परिव्यय धनराशि 11479.52 लाख के सापेक्ष शत प्रतिशत अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष 10994.66 लाख व्यय हो चुका है, जो अवमुक्त धनराशि का 95.78 प्रतिशत है। डीएम ने बीस सूत्रीय कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए कहा कि जो विभाग ए श्रेणी में है वे ए श्रेणी बने रहें और जो बी श्रेणी में है वे ए श्रेणी में आने का प्रयास करें। बैठक में सीडीओ एसएसएस पांगती, डीडीओ केएन तिवारी, सीएमओ संजय साह, डॉ. उदय शंकर, आदि अधिकारी मौजूद थे।