शहर की सड़कों के किनारे कदम-कदम पर बिजली के खंबे मौत बनकर खड़े हैं। कई लोहे के खंबे गलने के कारण धराशायी होने की कगार पर हैं। हल्की हवा के झौंकों में ही यह खंबे हिलने लगते हैं। यदि समय रहते हवा में लटक रहे इन पोलों को बदला नहीं गया तो गंभीर हादसा हो सकता है।
बागेश्वर नगर में वर्षों पूर्व गाड़े गए बिजली के खंबों का निचला हिस्सा पूरी तरह से गल चुका है। नगर के गोमती पुल, बागनाथ मंदिर गेट और जिला अस्पताल के समीप सहित आधा दर्जन स्थानों पर बिजली के खंबे धराशायी होने की कगार पर हैं।
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गोमती पुल के पास निचला हिस्सा आधे से अधिक गल जाने से पोल पुल की ओर को झुक गया है। यदि यह पोल धराशायी हुआ तो करंट युक्त तार लोहे के पुल पर गिरेंगे इससे गंभीर हादसा हो सकता है। यही हाल जिला अस्पताल के पास भी बना हुआ है। यहां पर भी गले हुए पोल खतरा बनकर खड़े हैं। नगर के कुछ स्थानों पर विभाग ने जर्जर पोल बदल तो दिए हैं लेकिन नीचे से पूरी तरह गल चुके इन खंबों को हटाया नहीं गया है।
यह खंबे भी लोगों के लिए खतरा बने हैं। यदि यह खंबे भीड़भाड़ के समय सड़कों पर गिरे तो जानमाल का खतरा पैदा हो सकता है। परंतु पावर कार्पोरेशन की ओर से ऐसे पोलों को हटाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए हैं। इस संबंध में पावर कार्पोरेशन के ईई भास्कर पांडेय ने बताया कि जर्जर हाल हो चुके पोलों का चिन्हीकरण किया जा रहा है। जो भी पोल गल चुके हैं उन्हें जल्दी हटाकर उनके स्थान पर नए खंबे लगाए जाएंगे।