नगर में चल रही रामलीला में दर्शकों की खासी भीड़ उमड़ रही है। शुक्रवार रात की रामलीला में सुमंत के अयोध्या लौटने, दशरथ मरण, भरत के राम, लक्ष्मण और सीता को वापस ले जाने की विनती का मंचन किया गया। श्रवण कुमार के मंचन को दर्शकों ने खूब सराहा।
सुमंत के किरदार ने चौपाई अवध में काहे मुख ले जाऊं कहूं क्या पूछे जब राजा..., सुमंत ने अयोध्या पहुंचकर दशरथ से वन की कहानी इस तरह कही नाथ भानु कुल भानु सुनो प्रभु कहूं मैं शीष नवाके...., दशरथ ने सुमंत से कहा कहां हैं मेरे प्राण पियारे... कहते हुए राम के वियोग में अपने प्राण त्याग दिए।
गुरु वशिष्ठ के कहने पर भरत और शत्रुघ्न को बुलाने के लिए दूत कैकेईपुर भेजे गए। भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या पहुंचने पर उन्होंने अपनी माता से पिता की मृत्यु और राम के वन जाने का कारण जाना। इसके बाद भरत परिवार के पूरे सदस्यों के साथ राम को वन से लौटाने के लिए चित्रकूट गए।
वहां राम ने भरत से रागिनी में भारत वीर पलटि जाओ घर को..., भरत ने राम से रागिनी में लेते रहियो नाथ घबरिया मोरी... कहकर रामचंद्र जी की खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौटे। दशरथ त्याग से पहले यहां श्रवण कुमार के दृश्य का खूबसूरत मंचन किया गया।
राम की अदाकारी मनोज पांडे, लक्ष्मण सूरज बिष्ट, सीता आशीष साह, भरत भानु तिवारी, शत्रुघ्न भानु बिष्ट, दशरथ शंकर साह और श्रवण कुमार की भूमिका नवीन साह ने निभाई।
मंचन का संचालन डायरेक्टर दीप साह औैर कंचन साह ने किया। वहां भाजपा नेता सुनील भंडारी, वरिष्ठ व्यापारी नवीन पुनीत साह, मनोज कपकोटी आदि मौजूद थे। कमेटी के अध्यक्ष महेश पंत ने अतिथियों का स्वागत किया।