मानसून की बेरुखी के बीच इंद्रदेव पर निर्भर खेती पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जिले में धान की 14 हजार हेक्टेयर के लिए तैयार नर्सरी सूखने के कगार पर आ गई है। खेती पर मंडरा रहे संकट का खामियाजा किसानों को पैदावार में गिरावट के रूप में उठाना होगा। रविवार रात हुई बारिश कई दृष्टि से लाभकारी तो है लेकिन प्रभावित किसान इस बारिश को अब का वर्षा जब फसल सुखानी कहने लगे हैं।
जिले में धान की खेती का रकबा लगभग 14 हजार हेक्टेयर है। कुछेक स्थानों पर सिंचाई के साधनों के इतर अधिकांश खेती बारिश पर निर्भर है। इन दिनों धान की फसल बोने की तैयारी चल रही है। किसानों ने इसके लिए नर्सरी तैयार की है। कई किसान मानसून की आस में हर साल की तरह पौध की रोपाई भी कर चुके हैं लेकिन मानसून की बेरुखी से धान की फसल को पानी नहीं मिल पा रहा। किसान काफी चिंतित हैं।
उधर कमस्यारघाटी के भेंसूड़ी गांव का बांसू गधेरे का जलस्तर काफी नीचे चला जाने से वहां सिंचाई के पानी का संकट खड़ा हो गया है। गांव के 63 काश्तकारों की धान के पौधों की रोपाई का काम प्रभावित हो गया है।
सिंचाई विभाग के काम पर उठे सवाल
सिंचाई की व्यवस्था न होने से विभाग के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। पानी की कमी के बीच जिले भर से सिंचाई नहरों की बदहाली की शिकायतें आ रही हैं। जहां नहरें हैं, वहां भी किसानों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही। तमाम स्थलों पर पानी के स्रोत होने के बावजूद सिंचाई टैंक न बनने से भंडारण की व्यवस्था नहीं हो पाई है। स्रोतों से पानी जाया हो रहा है और किसान मानसूनी पानी का इंतजार कर रहे हैं।
सूखी नर्सरी का मुआवजा मांगा
जिले के मौसम की मार से प्रभावित अन्य क्षेत्रों की तरह ही मुख्यालय से 30 किमी दूर जारती गांव में धान की नर्सरी सूख चुकी है। इससे ग्रामीण परेशान हैं। उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप सिंह मेहता, जीवन सिंह, नरेंद्र सिंह, कवींद्र सिंह ने विभाग से सूखी नर्सरी का मुआवजा मांगा है।
बारिश न होने से धान की पैदावार को लेकर चिंता बनी है। नर्सरी और रोपाई प्रभावित होने को लेकर कई किसानों की शिकायतें मिली हैं। विभाग इस समस्या पर नजर बनाए हैं।
- वीपी मौर्या, मुख्य कृषि अधिकारी, बागेश्वर
भीषण गर्मी से सागभाजी की फसल सूखी
विकास खंड गरुड़ के कमुरौड़ा, कन्स्यारी, गढ़सेर, सिमार, मन्यूड़ा सहित विकास खंड के 106 गांवों के काश्तकार सागभाजी की खेती से जुड़े है। लंबे समय से बारिश नहीं होने से जल स्रोतों में पानी कम होने से काश्तकारों के साग सब्जी की पौध सूख गई है। मटेना गांव में कई किसानों की धान के पौधों की नर्सरियां अब सूख चुकी हैं।
कुमरौड़ा गांव के काश्तकार मनोज भरड़ा, दिवान सिंह, राजेंद्र सिंह, धाम सिंह सुनौला ने बताया कि भीषण गर्मी पड़ने से लौकी, करेला, मूली, बैगन, खीरा, गाजर, शिमला मिर्च, ककड़ी, टमाटर के पौध सूख गए हैं। कुमरौड़ा गांव के प्रगतिशील काशतकार मनोज भरड़ा ने बताया कि भीषण गर्मी पड़ने से वह आज तक सब्जी से मुनाफा नहीं कमा पाए हैं। जबकि गत वर्ष जून माह में पचास हजार की सब्जी बेच चुके थे।
विकास खंड के अणां, पचना, नौघर, पुुरुड़ा, सरोली, माल्दे, तैलीहाट, मेलाडुंगरी के सागभाजी के काश्तकारों ने बताया कि पौधे पीले पड़ गए है। रिठाड़ गांव के काश्तकार और वन पंचायत सरपंच अर्जुन राणा ने बताया कि बाजार में सब्जियां उपलब्ध नहीं है। उद्यान अधिकारी नारायण सिंह भयेड़ा ने बताया कि विकास खंड का हर दूसरा काश्तकार परेशान है।