नेपाल के दैलेख निवासी युवक की अज्ञात परिस्थितियों में मौत हो गई। युवक का शव बजीना के जंगल में चीड़ के पेड़ पर लटका हुआ था। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
नेपाल के दैलेख निवासी मनोज रावल (33) पुत्र गौराबहादुर चार साल से कांडा में स्टेशन के पास रहता था। उसके साथ पत्नी और तीन बच्चे भी रहते थे। मनोज श्रमिक था। इन दिनों वह निर्माणाधीन कोषागार भवन में काम कर रहा था। मंगलवार की शाम मनोज काम से नहीं लौटा। परिजन रात भर इंतजार में रहे। बुधवार की सुबह उसका शव निकटवर्ती बजीना गांव के चीड़ गाड़ में एक मेहल के पेड़ पर रस्सी के सहारे लटका मिला। ग्रामीणों ने राजस्व पुलिस को सूचना दी। कानूनगो चंद्र सिंह हरकोटिया और बजीना क्षेत्र के राजस्व पुलिस उपनिरीक्षक पूरन गिरि मौके पर पहुंचे। उन्होंने शव उतारकर कब्जे में लिया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। मृतक के सालेे करन बहादुर ने राजस्व पुलिस में दी तहरीर में मामले की जांच की मांग उठाई है।
किसी के गले नहीं उतर रही खुदकुशी की बात
नेपाली श्रमिक की खुदकुशी का कारण लोगों की समझ में नहीं आ रहा है। नेपाल की भूकंप त्रासदी को लेकर भी उसे कोई तनाव नहीं था। मनोज सुनारगांव के लिए निर्माणाधीन सड़क के किनारे ही पेड़ पर लटका था। यह स्थान उसके निवास से लगभग तीन किमी की दूरी पर है। राजस्व पुलिस उप निरीक्षक पूरन गिरि ने बताया कि पत्नी और अन्य करीबी लोगों से बात करने पर भी कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। राजस्व पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम में भी फंदे के कारण दम घुटने की पुष्टि हुई है। फिर भी सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।