क्रिकेटर कमलेश नगरकोटी के गांव भरसीला का मकान।
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विश्व फलक पर चमक रहे तेज गेंदबाज कमलेश नगरकोटी का गांव तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। पिथौरागढ़ जिले की सीमा से लगे इस गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंक जैसी कोई सुविधा नहीं है। यहां तक कि गांव से होकर गुजरने वाली सड़क पर भी साल में केवल चार-पांच महीने ही यातायात की सुविधा मिलती है।
क्रिकेटर कमलेश का गांव भरसीला जिला मुख्यालय से 37 किमी की दूरी पर है। गांव की सीमा खत्म होते ही पिथौरागढ़ जिले के बनकोट गांव का इलाका शुरू हो जाता है। गांव में हाइस्कूल की पढ़ाई तक के लिए विद्यालय नहीं है।
विद्यार्थियों को हाइस्कूल और इंटर के लिए गुरना या फिर पिथौरागढ़ जिले के बनकोट जाना पड़ता है। चिकित्सा सेवाओं का भी यही हाल है। दवा लेने के लिए भी ग्रामीणों को बनकोट ही जाना पड़ता है। वहीं बैंक की कोई सुविधा नहीं होने से आठ किमी दूर कांडा तहसील मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।
कमलेश की चाची कमला नगरकोटी और गांव के ही लक्ष्मण सिंह नगरकोटी ने बताया कि यहां के लिए अभी पक्की सड़क नहीं बनी है। यह सड़क बरसात में अक्सर बंद रहती है। साल भर में उन्हें केवल चार-पांच महीने ही यातायात की सुविधा मिल पाती है।
ग्रामीणों को है क्षेत्र के विकास की उम्मीद
कमलेश के क्रिकेट में पहचान बनाने के बाद भरसीला गांव के लोगों को क्षेत्र के विकास की उम्मीद है। ग्रामीणों ने बताया कि अभी तक उनका गांव तमाम असुविधाओं से जूझ रहा है। चुनावों के समय नेता आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि कमलेश ने जिस क्षेत्र का नाम रोशन किया है, उसके विकास पर जरूर ध्यान दिया जाएगा।