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Bageshwar News: सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार

Wed, 11 Oct 2023 11:38 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
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बागेश्वर। सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए व्यापारियों के खिलाफ आई धोखाधड़ी और आत्महत्या के लिए उकसाने की अपील को खारिज करने का फैसला पारित किया।
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वादी मोहित पंत ने सत्र न्यायालय में प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए बताया था कि व्यापारी इंद्र लाल और महेंद्र लाल ने उसके पिता सुरेश चंद्र पंत के साथ धोखाधड़ी की थी। इससे परेशान होकर उन्होंने 22 फरवरी 2015 को आत्महत्या कर ली। माता किरन पंत ने उनके निधन के तुरंत बाद पुलिस को आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। आरोपी प्रभावशाली और बड़े व्यापारी हैं। जिसके चलते पुलिस ने तीन साल तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस 2015 में ही मामले को कार्यवाही अपेक्षित नहीं है, कहकर समाप्त कर चुकी थी।


वादी ने 156 (3) के तहत न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। जिसके बाद पांच अप्रैल 2018 को पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 120 बी, 406, 306 के तहत केस दर्ज किया। विवेचना के बाद पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की। इस मामले में सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और वादी के रिवीजन प्रार्थना पत्र को खारिज किया। आरोपियों की ओर से पैरवी अधिवक्ता हरीश चंद्र जोशी ने की।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट ने यह सुनाया था फैसला

न्यायिक मजिस्ट्रेट पुनीत कुमार की अदालत ने 12 जून 2023 को मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि धारा 306 के तहत किसी भी व्यक्ति को दंडित करने के लिए आरोपी की उस व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए उकसाने की मंशा होनी चाहिए। पुलिस विवेचना से प्रतीत होता है कि वादी के पिता और आरोपियों के बीच वादी के पिता की जमीन खरीदने का करार हुआ था, जबकि वह जमीन पूर्व से ही उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में बंधक थी। जमीन वादी की माता किरन पंत के नाम पर थी। उसके पिता के कृत्य से यह विदित होता है कि उनकी मंशा स्वयं उस जमीन को बेचने की थी। परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए मामले में अग्रिम विवेचना कराया जाना आवश्यक प्रतीत नहीं होता है। फैसले के खिलाफ वादी ने सत्र न्यायालय में अपील की।
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