बागेश्वर में राज्य गठन के 20 वर्ष पूरे होने पर हुई गोष्ठी में बोलते बार संघ अध्यक्ष गोविंद सिंह भं?
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बागेश्वर। राज्य बनने के बीस वर्ष में उत्तराखंड ने क्या खोया-क्या पाया विषय पर हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड को बचाना है तो यहां की जमीनों को बचाना होगा। वक्ताओं ने पंचेश्वर जैसे विशालकाय बांध को एक सभ्यता और संस्कृति को समाप्त करने की साजिश बताया।
बागेश्वर के बार एसोसिएशन के सभागार में वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने राज्य बनने के 20 वर्ष बाद भी समस्याओं के अंबार के लिए अब तक की सरकारों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि राज्य गठन की मूल अवधारणा के अनुसार नीति नियंताओं ने नीतियां नहीं बनाई। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। कहा कि राज्य की जमीनों पर उद्योगपतियों की नजर है। उत्तराखंड को बचाना है तो यहां की जमीनों को बचाना होगा।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि सरकार पंचेश्वर बांध बनाने जा रही है। पंचेश्वर बांध उत्तराखंड को बर्बाद करने की साजिश है। इससे सभ्यता और संस्कृति को गहरी चोट पहुंचेगी। सरकारें पहाड़ का अस्तित्व समाप्त करने पर तुली हुई हैं। जनता को ऐसे किसी भी परियोजना के खिलाफ लामबंद होना होगा। वक्ताओं ने कहा कि सरकार सुअर, बंदरों से तक निजात नहीं दिला पा रही है। कहा कि पहाड़ में रहने वाले लोगों को जबरन पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है। गोष्ठी में जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद सिंह भंडारी, एडवोकेट भगवती धपोला, अपूर्वा भट्ट, रमेश प्रकाश पर्वतीय, ईश्वर जोशी, गोविंद सिंह महरा, मोहम्मद यूसुफ, सेरी राम, हरीश राम, पीएस मेहता, दीपा कोरंगा, हरीश सिंह मेहरा ने विचार रखे।