रानीखेत (अल्मोड़ा)। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को गांधी चौक पर केंद्र सरकार का पुतला दहन किया। उन्होंने नारे लगाकर विरोध जताया।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा कोई सामान्य योजना नहीं बल्कि संघर्ष से निकला कानून है जिसने ग्रामीण क्षेत्र में करोड़ों लोगों को रोजगार देने का कानूनी अधिकार दिया है। कानून ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारों को 100 दिन के सुनिश्चित रोजगार की गारंटी देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार इस कानून को कमजोर कर मजदूरों के अधिकारों पर हमला कर रही है। महात्मा गांधी के नाम व मूल्यों को मिटाने की साजिश कर रही है। नगर अध्यक्ष उमेश भट्ट ने बताया कि अधिकार आधारित कल्याणकारी कानूनों को समाप्त कर केंद्र नियंत्रित चैरिटी मॉडल लाने की मंशा से सीधे तौर पर गरीबों के काम के अधिकार को खत्म किया जा रहा है। प्रदर्शन में महेश आर्या, कमलेश बोरा, गीता पवार, नेहा साह माहरा, कुलदीप कुमार, अंकित पडालिया पंत, पारस खत्री, गोपाल देव, भगवंत नेगी, विनीत चौरसिया, विश्व विजय सिंह माहरा, त्रिलोक आर्या, माधवी देवी, रेखा अधिकारी, सोनू सिद्दीकी आदि रहे ।