मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत 18 नवंबर को पहली बार जिले के भ्रमण पर आ रहे हैं। लोगों को उनसे क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं किए जाने की उम्मीदें हैं। खासकर बेस अस्पताल, काफलीगैर में डिग्री कॉलेज, गरुड़ को नगर पंचायत का दर्जा देने की मांगें मुख्य हैं।
बता दें कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी ढाई लाख से अधिक है।
इस जिले की सीमाएं उत्तर में हिमालय की लंबी श्रृंखला से आच्छादित है, पूर्व में पिथौरागढ़, दक्षिण में अल्मोड़ा जिला जबकि पश्चिम की सीमा अल्मोड़ा और चमोली गढ़वाल से लगी हुई हैं। प्राकृतिक छटा से भरपूर यह जिला विकास की दृष्टि से अब भी काफी पिछड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और रोजगार की कमी होने से यहां अब तक सैकड़ों घरों में ताले लटक गए हैं। अलग राज्य बनने के बाद हालांकि विकास की धारा बहने की थोड़ी शुरूआत जरूर हुई, लेकिन इसकी रफ्तार आज भी तेज नहीं हो सकी है। जिले की कई समस्याएं आज भी लोगों को मुंह चिड़ा रही हैं।
ये उम्मीदें हैं जिले वालों को सीएम से
जिले के लोगों की यहां बेस अस्पताल खोलने, खेल स्टेडियम, बागनाथ और चंडिका मंदिर में धर्मशालाओं का निर्माण करने, गरुड़ को नगर पंचायत का दर्जा देने, काफलीगैर में डिग्री कॉलेज खोलने, जेठाई पेयजल योजना, कपकोट और कांडा में पूर्व घोषित आयुर्वेदिक इंस्टीट्यूट, कपकोट में फॉरेस्ट ट्रेनिंग सेंटर, केदारेश्वर मैदान को स्टेडियम बनाने, सरयू के संरक्षण के लिए विकास प्राधिकरण बनाने, चिरपतकोट और शिखर पर्वत को रोप-वे से जोड़ने समेत कई अन्य मांगें लंबित चल रही हैं।
इधर, भाजपा जिलाध्यक्ष शेर सिंह गढ़िया ने बताया कि बागेश्वर और कपकोट के विधायकों के साथ बैठक कर मांग पत्र तैयार किया गया है। जनता मिलन कार्यक्रम के दौरान यह पत्र सीएम को सौंपा जाएगा।