जिले के डॉट्स केंद्र में पिछले एक माह से क्षय रोग के एक्सडीआर मरीजों की दवाएं नहीं हैं। इससे एक्सडीआर स्तर के क्षय रोगी जीवन और मौत से जूझ रहे हैं। कपकोट क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य विभाग से जिला अस्पताल के डॉट्स केंद्र में शीघ्र दवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
सोमवार को जिला अस्पताल के डॉट केंद्र पहुंचे जिला पंचायत सदस्य गोविंद दानू और भागीरथी देवी ने कहा कि डॉट्स सेंटर में एक्सडीआर के मात्र दो मरीज हैं। इनमें से एक मरीज कपकोट निवासी मदन सिंह का बेटा मेहरबान सिंह है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में इलाज के बाद संस्थान ने मेहमान सिंह को रेफर कर दिया।
इसके बाद एक माह पूर्व उसका पंजीकरण बागेश्वर के डॉट्स केंद्र में किया, लेकिन अभी तक केंद्र में दवाएं नहीं हैं। ऐसे में मरीजों की जान को खतरा बना हुआ है। लोगों ने केंद्र प्रभारी डॉ. अजय बिष्ट से शीघ्र मरीज के लिए एक्सडीआर की दवाएं मंगाने की मांग की। एक्सडीआर के मरीज मेहमान सिंह के पिता ने दवाएं की मांग को लेकर डीएम को भी ज्ञापन सौंपा है।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. जेसी मंडल ने बताया कि इस समय बागेश्वर के डॉट्स केंद्र में एक्सडीआर की दवाएं नहीं हैं। एक्सडीआर की दवाएं स्टेट टीबी ऑफिस से ही केंद्रों में आती हैं। जिले में पंजीकृत मरीजों के लिए दवाएं मंगाई गई हैं।
क्षय रोग- क्षय रोग की तीन स्टेज होती हैं। पहली स्टेज में रोगी कॉमन टीबी का पेशेंट होता है। नियमित दवाएं नहीं खाने पर दूसरी स्टेज एमडीआर स्टेज और तीसरी स्टेज एक्सडीआर स्टेज कहलाती है। यह क्रिटिकल स्टेज मानी जाती है। एक्सडीआर स्टेज के मरीजों के लिए दवाईयां बेहद महंगी होती है और बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होती हैं। यह दवाइयां स्टेट टीबी आफिस से केंद्रों को रजिस्टर्ड मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं। बागेश्वर में एमडीआर के 18 पेंशेंट हैं। एमडीआर की दवाएं भी यहां पर मौजूद हैं। एक्सडीआर के रेयर मामले होते हैं।
- डाॅ. अजय बिष्ट, जिला क्षय रोग अधिकारी, बागेश्वर ।