श्रम संगठनों के भारत बंद के आह्वान का यहां भी व्यापक असर रहा। शहर में कोई वाहन नहीं चले। बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं में काम काज ठप रहा। आशा वर्कर्स ने श्रम कानूनों में संसोधन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
जिले में यातायात व्यवस्था का पूरा दारोमदार केएमओ और टैक्सियों पर है। यहां बसों और टैक्सियों का संचालन पूरी तरह ठप रहा। अलबत्ता कुछ निजी कारेें और दोपहिया वाहन चले। आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
टेैक्सी यूनियन के महिपाल सिंह, अनिल टंगडिय़ा आदि ने कहा कि श्रम कानूनों मे संसोधन को निरस्त करने की मांग के साथ ही वह दुर्घटना होने पर चालक को दोषी ठहराए जाने और उसे सजा, जुर्माना करने की नीति का भी वह विरोध कर रहे हैं।
ऐक्टू से संबद्ध आशा वर्कर्स यूनियन ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। केंद्र की मोदी सरकार से श्रम कानून में किए गए संसोधनों को खारिज करने की मांग की।
इससे पहले हुई सभा मे कहा गया कि केद्र सरकार कारपोरेट घरानों के इशारों पर नाच रही है। पूंजीपतियों की सुविधा के मुताबिक कानून बनाकर श्रमिकों को गुंलामी की तरफ धकेला जा रहा है।
प्रदर्शन में तारा देवी, किरन उपाध्याय, गोविंदी आदि ने भाग लिया। राज्य निगम कर्मचारी महा संघ ने मांगों को लेकर बैठक की, जिसमें जीएस बाफिला, अनिल साह आदि ने भाग लिया।
नगर और जिले के सभी बैेंकों मेें हड़ताल के कारण काम काज ठप रहा। संचार निगम में भी हड़ताल रही। हयात सिंह बिष्ट, केडी जोशी, रमेश चंद्र, बसंत बल्लभ आदि ने नारेबाजी की। भारतीय जीवन बीमा कार्यालय में भी हड़ताल के कारण काम नहीं हुआ।