बागेश्वर नगर के नदीगांव में सफाई व्यवस्था रामभरोसे है। रोज सफाई न होने से लोगों के घरों का कूड़ा सड़क के किनारे जमा होकर गंदगी फैला रहा है। कुछ कूड़ा गोमती में भी गिर रहा है।
नगर पालिका की ओर से वहां लगाया गया एक कूड़ेदान भी गायब हो गया है। कचरे की सफाई न होने से कई नालियां भी बंद पड़ी हैं।
हालात यह हैं कि गंदगी के कारण लोगों को नाक में रुमाल रखकर आना, जाना पड़ रहा है। इससे आक्रोशित लोगों ने पालिका प्रशासन से रोजाना सफाई करवाने की मांग की है।
हरीश पांडे ने बताया कि नदी गांव में नियमित सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। लोग घरों का कूड़ा खुले में फेंकने को मजबूर हैं। पहले पालिका ने एक कूड़ेदान रखा था वह गायब हो चुका है। कूड़ा निस्तारण के लिए पालिका को मोहल्ले में सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ेदान रखने चाहिए।
गोविंदी भट्ट का कहना है कि नदीगांव में कूड़ा निस्तारण के लिए कोई स्थान नहीं है। आखिर कूड़ा कहां फेंकें। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था न होने से लोग नदी किनारे या फिर सड़क के किनारे कूड़ा डालने को मजबूर हैं। नगरपालिका को नियमित रूप से सफाई की व्यवस्था करनी चाहिए।
गीता गढ़िया ने बताया कि नदी गांव में कूड़ा निस्तारण न होना बड़ी समस्या है। रोजाना सफाई न होने के कारण नालियां भी कूड़े से भर गई हैं। इनकी सफाई न होने से दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। नगर में सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
पूजा का कहना है कि सफाई व्यवस्था के लिए नगरपालिका को नदी गांव में सफाई कर्मचारियों की तैनाती करनी चाहिए। प्रतिदिन घरों से कूड़ा उठाया जाय तो गंदगी से निजात मिल जाएगी। कूड़े के कारण गर्मियों में बीमारी का खतरा बना रहता है। नाम में रुमाल रखकर आवाजाही करनी पड़ती है।
अंबा पांडे का कहना है कि नदीगांव को जाने वाले मुख्य मार्ग में कूड़े का ढेर बन गया है। इस कूड़े को बंदर और आवारा जानवर पूरे रास्ते में फैला देते हैं। नदी के साथ ही खेतों में भी कूड़ा फैल रहा है। इससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। शीघ्र कूड़ा निस्तारण के उचित प्रबंधन की जरूरत है।
प्रमोद पांडे ने बताया कि नदी गांव की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। इसके लिए नगरपालिका को सभी चौराहों पर कूड़ेदान लगाने चाहिए। इसके साथ ही हर दिन कूड़ा उठाने की व्यवस्था भी करनी चाहिए। इससे धार्मिक महत्व की नदियों को साफ भी रखा जा सकेगा।