खनन पर रोक लगने से जिले की रीमा से लेकर कांडा तक खड़िया खदानों में खामोशी छा गई है। काम बंद होने से मजदूरों से लेकर दुकानदार तक बेगार हो गए हैं। नेपाली मजदूर घरों को वापसी के लिए भुगतान होने का इंतजार कर रहे हैं।
जिले में रीमा से लेकर कांडा तक 75 खड़िया खानें हैं। इन खानों से हर साल तीन लाख टन खड़िया निकालकर मैदानी क्षेत्रों को भेजी जाती है। इन खदानों में काम करने के लिए पांच हजार से अधिक नेपाली मजदूर हर साल यहां आते हैं। खदानों के काम से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 15 हजार लोगों को रोजगार मिलता है। ग्रामीण क्षेत्र की छोटी-मोटी दुकानें भी इसी से चलती हैं। हाइकोर्ट द्वारा अगले चार माह तक खनन पर रोक लगाने के निर्देशों के बाद बागेश्वर जिले की खड़िया खदानों में काम पूरी तरह से बंद हो गया है। इन खदानों में काम बंद होने से मजदूर खाली हाथ बैठे हैं। खड़िया ढुलान के लिए लगे सैकड़ों वाहनों के पहिए भी थम गए हैं। खदानों में काम नहीं होने से जहां हजारों मजदूरों की रोटी-रोटी पर संकट आ गया है। खदानों में काम करने वाले मजदूर धीरे-धीरे जाने लगे हैं। अधिकांश मजदूर अभी भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। इधर खदानों का काम बंद होने के बाद ग्राहकों की कमी से ग्रामीण क्षेत्र के दुकानदार भी परेशान होने लगे हैं।