गरुड़ (बागेश्वर)। वन प्रभाग बागेश्वर के बैजनाथ और गढ़खेत रेंज क्षेत्र में आए दिन आंधी तूफान आने से चीड़ के जंगल पिरुल से लबालब हो गए हैं। इससे दावाग्नि की घटनाओं का खतरा बना है। वन विभाग ने जंगलों से एकदम जुड़े ग्रामीणों से पिरुल हटाने का आह्वान किया।
वन प्रभाग बागेश्वर के बैजनाथ और गढ़खेत रेंज के जंगल इस बीच पिरुल से पट गए हैं। भारी मात्रा में पिरुल गिरने से अधिकांश पशुपालकों ने अपने जानवरों को जंगल भेजना बंद कर दिया है। पिरुल गिरने से दावािग्नि का खतरा बना है। वन रेंजर बैजनाथ सुरेंद्र सिंह नेगी, गढ़खेत रेंज के रेंजर हरीश खर्कवाल ने बताया कि इस बीच आंधी-तूफान आने से जंगलों में तेज हवाओं के बीच काफी मात्रा में पिरुल गिर गया है। वन कर्मी सड़क मार्ग से हर रोज पिरुल हटा रहे हैं। उन्होंने जंगल से एकदम सटे गांवों के ग्रामीणों से आबादी के आसपास से पिरुल हटाने की मांग की है।
पिरुल क्रय करने की बात हवाहवाई
गरुड़ (बागेश्वर)। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने कहा कि सरकार आये दिन पिरुल क्रय करने के साथ पिरुल से आधारित उद्योग लगाने की वकालत करती आ रही है। उन्होंने बताया कि बागेश्वर वन प्रभाग के बागेश्वर, धरमघर, बैजनाथ, कपकोट आदि रेंजों के जंगलों में इस बीच काफी मात्रा में पिरुल गिरा है। सरकार की किसी भी एजेंसी ने आज तक न तो विभाग से और न ही ग्रामीणों से पिरुल क्रय किया है।