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यहां तो नदी में डाल दिया जाता है नगर का कूड़ा

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घोर लापरवाही:कूड़ा डालकर गरुड़ गंगा को इस तरह किया जा रहा प्रदूषित। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। हर साल पांच जून को विश्व पर्यवरण दिवस मनाया जाता है। पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए वर्षभर गोष्ठियों का दौर चलता है। पर्यावरण संरक्षित रखने के लिए सरकारी स्तर पर कार्यक्रम चलते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति काफी उलट रहती है। गरुड़ का ही उदाहरण ले लीजिए। सारे नगर का कूड़ा गरुड़ गंगा में डाल दिया जा रहा है। इससे नदी तो प्रदूषित हो ही रही है। आसपास का वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है।
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गरुड़ में बाजार का कूड़ा कई वर्षों से सड़क किनारे से गरुड़ गंगा में धकेल दिया जाता है। पिछले साल गरुड़ को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया लेकिन अब भी गरुड़ नगर से निकलने वाले कूड़े का समाधान सरकारी तंत्र और नगर पंचायत प्रशासन नहीं ढूंढ पाया है। अब भी नगर का कूड़ा बदस्तूर गरुड़ गंगा में फेंक दिया जा रहा है।
नगर का कूड़ा गरुड़ गंगा में डालने से नदी के पवित्र जल को नुकसान पहुंच रहा है। आसपास का वातावरण भी दूषित हो रहा है। कई बार यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के सामने उठ चुका है लेकिन नगर पंचायत के कूड़े के निस्तारण के लिए ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने की ओर पुख्ता कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सवाल यही है कि तब तक नगर के कूड़े का भार गरुड़ गंगा ढोती रहेगी।
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ट्रंचिंग ग्राउंड न होने से नगर का कूड़ा गरुड़ गंगा के किनारे डाला जाता है। अभी नगर पंचायत के भवन आदि की ही व्यवस्था नहीं हुई है। ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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सतीश पंवार ईओ नगर पंचायत गरुड़
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