पर्वतीय जिलों में पहाड़ियों के दरकने की समस्या का समाधान अब चाइना बांस के रूप में सामने आया है। वन अनुसंधान की ओर से तैयार की गई यह बांस की प्रजाति पहाड़ियों के दरकने को रोकेगी।
वन अनुसंधान के मुताबिक हर साल पहाड़ियां दरकने से करोड़ों का नुकसान होता है। पहाड़ियों का दरकना सड़क दुर्घटनाओं का सबब भी बनता है। अब वन अनुसंधान ने शोध के बाद बांस की मोसो बंबू (चाइना बांस) प्रजाति तैयार की है। इसका वैज्ञानिक नाम फाइकोसाइट ट्यूबीसेंट है।
25-30 फिट लंबे इस बांस की खासियत यह है कि कम पानी में और रखरखाव के अभाव में भी आसानी से पनप जाता है। मिट्टी की जकड़ मजबूत करने में उपयोगी होता है। बांस की लंबाई अधिक होने से पहाड़ी के ऊपर से गिर रहे पत्थरों को भी रोकने में मदद मिलती है।
20-25 मीटर लंबी होती है चाइना बांस की जड़
आम बांस की जड़ अधिकतम 10-15 मीटर लंबी होती है। वहीं चाइना बांस की जड़ 20-25 मीटर तक फैलती है। मिट्टी की बांडिंग पावर बढ़ा कर क्षरण पर रोक लगाती है। इस तरह एक बांस का पौधा 20-25 मीटर की दूरी तक भू क्षरण रोकने में कामयाब होता है।
हादसों को भी कर सकता है नियंत्रित
पहाड़ में एक बड़ी समस्या है कि वाहन बेकाबू होकर खाई से नीचे गिर जाते हैं। इससे मामूली हादसे में भी घातक हो जाते हैं। इधर चाइना बांस की खूबी यह है कि 25-30 फिट लंबे होते हैं। मजबूत भी होते हैं। इन बांसों को अगर पहाड़ी किनारे रोपा जाता है तब वाहन इनमें अटक जाएंगे और बड़ा हादसा होने से टल सकता है।
चाइना बांस मिट्टी का क्षरण खासकर पहाड़ियों से भू क्षरण रोकने में मदद गार है। इसकी नर्सरी तैयार की गई है। अब इसको पर्वतीय जिलों में लगाने की योजना है ताकि भू क्षरण की रोकथाम हो। - मदन सिंह, नर्सरी प्रभारी वन अनुसंधान