राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद विज्ञान, प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार और राज्य समन्वयक संस्था पीपुल्स एसोसिएशन ऑफ हिल एरिया लांचर्स की ओर से होने वाली राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस से पूर्व शिक्षकों की अभिमुखीकरण कार्यशाला हुई। कार्यशाला में विभिन्न विषयों और उप विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
जिला समन्वयक प्रमोद तेवाड़ी ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस अच्छा प्लेट फार्म है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की अच्छी तैयारी करवाने को कहा।
मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय सभागार में जिला समन्वयक तेवाड़ी ने जानकारी दी कि इस वर्ष के मुख्य विषय मौसम और जलवायु की समझ के छह उप विषयों में अपने चारों ओर के मौसम की समझ, मौसम जलवायु पर मानवीय हस्तक्षेपों का प्रभाव, मौसम जलवायु परिवर्तन, मौसम जलवायु, समाज और संस्कृति, मौसम जलवायु और कृषि, मौसम जलवायु और स्वास्थ्य पर बाल वैज्ञानिकों के समूहों द्वारा दो वर्गों में शोध पत्र तैयार किए जाएंगे।
कार्यशाला में विभिन्न उप विषयों पर संभावित परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। राज्य संदर्भ व्यक्ति कैलाश चंदोला ने क्षेत्र की जलवायु और मौसम का वहां के लोगों के रहन-सहन पर पड़ने वाले असर आदि के बारे बताया।
रमसा के जिला संदर्भदाता डा. शैलेंद्र धपोला ने डा. एपीजे अब्दुल कलाम के विज्ञान के क्षेत्र में दिए गए योगदान का उल्लेख किया।
संचालन करते हुए सह समन्वयक दीप चंद्र जोशी ने बताया कि ब्लाक और जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन क्रमश: अक्तूबर प्रथम और अक्तूबर अंतिम सप्ताह में होगा। अंत में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की गई।