नगर में अब तक वाहनों के लिए एक पार्किंग तक नहीं बन पाई है। जबकि वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। पार्किंग स्थल नहीं होने से दोपहिया या बड़े वाहनों को मजबूरन सड़कों के किनारे खड़ा करना पड़ रहा है। इससे यातायात व्यवस्था तो प्रभावित हो ही रही है अव्यवस्थाओं का खामियाजा वाहन स्वामियों को चालान के रूप में भी भुगतना पड़ रहा है।
जिले में पंजीकृत कुल वाहनों में से लगभग सात हजार दोपहिया वाहन हैं। परंतु इन वाहनों के लिए शहर में एक भी पार्किंग स्थल नहीं है। रविवार को छोड़कर अन्य सभी दिनों सड़कों में दोपहिया वाहनों की सबसे अधिक आवाजाही रहती है। ऑफिस, बैंक, स्कूल सहित अन्य संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी दोपहिया वाहनों से ही घरों से निकलते हैं। यहां पर ज्यादातर संस्थानों के पास अपने पार्किंग स्थल नहीं हैं। ऐसे में सड़क किनारे ही वाहनों को कतार में लगाकर खड़ा कर दिया जाता है।
दिन में बैंक, पोस्ट ऑफिस या खरीददारी सहित विभिन्न कार्यों से शहर में आने वाले लोगों को अपने दोपहिया वाहन की पार्किंग के लिए चुनिंदा स्थलों में स्थान नहीं मिलता है। लोगों को मजबूरन सड़क किनारे वाहन खड़ा करना पड़ता है। इस बीच नो पार्किंग में वाहन खड़ा करने पर उस वाहन का चालान हो चुका होता है। इस समस्या को देखते हुए यहां पर पार्किंग स्थल की जरूरत महसूस की जा रही है, लेकिन अभी तक पार्किंग स्थल के निर्माण को लेेकर कोई पहल नहीं हुई है। जिले के विभिन्न रूटों के लिए संचालित होने वाली टैक्सियों के लिए भी अलग से पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से संकरी सड़कों को ही अस्थायी पार्किंग बनाया गया है। आए दिन सड़कों में वाहनों की तादात बढ़ने से समस्या भी बढ़ रही है।