बागेश्वर में कचरे पर मंडराते जानवर।
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नगर और यहां की धार्मिक महत्व की नदियों की पवित्रता के लिए ठोस उपाय नहीं हो पाए हैं। कूड़ा निस्तारण का उचित प्रबंध और लोगों में जागरूकता की कमी के कारण अभी भी घरों और दुकानों का कूड़ा या तो सड़कों पर या नदी, नालों में फेंका जाता है।
बागेश्वर नगर में नगर ही नहीं आसपास के गांवों का कूड़ा भी पहुंचता है।
ग्रामीण क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं होने से यह कूड़ा नदियों तक पहुंचता है। यहां की धार्मिक महत्व की नदियों को कूड़ा मुक्त करने के लिए अमर उजाला की ओर से पिछले वर्ष नवंबर माह में स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया गया था। इसके तहत हर वार्ड में लोगों से मिलकर उनसे सरयू की पवत्रता की शपथ दिलाई गई।
इस अभियान का व्यापक असर हुआ। तत्कालीन जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल के निर्देश पर नगरपालिका की ओर से विशेष सफाई अभियान चलाया गया। नगरपालिका की ओर से पहली बार नदियों और घाटों को गंदा करने वालों के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए। आज सरयू में जमा गंदगी काफी हद तक कम हो गई है।
इसके बाद भागीरथी गधेरे को लेकर अभियान चला। इसमें जागरूक लोगों ने कोर कमेटी गठित कर गधेरे में उतरकर सफाई की। जिला प्रशासन की ओर से जेसीबी लगाकर गधेरे की सफाई की गई, लेकिन प्रबंधन की कमी के कारण धार्मिक नगरी और यहां की नदियों में जो सफाई व्यवस्था होनी चाहिए अभी वह हासिल नहीं हो पाई है।
नगर की सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। कूड़ा वाहन लगाए गए हैं। लोगों से कूड़ेदानों में ही कूड़ा डालने की अपील की जाती है। जिन स्थानों पर कूड़ेदान नहीं हैं या पुराने हो चुके हैं वहां पर शीघ्र ही नए कूड़ेदान खरीदकर लगाए जाएंगे।
गीता रावल, नगरपालिका, अध्यक्ष।