भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम के सेवानिवृत्त महानिदेशक एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डा. गंगा सिंह रौतेला ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक सोच का संचार विज्ञान के सिद्धांत से नहीं बल्कि प्रयोग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान का नियम बाद में प्रयोग पहले जरूरी है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रौतेला शिक्षा विभाग और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर विज्ञान कौतूहल विषय पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन सभागार में जिले भर के विज्ञान के शिक्षकों से रूबरू हुए। उन्होंने प्रयोग और स्लाइड शो के माध्यम से शिक्षकों को विज्ञान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। विज्ञान के शिक्षकों से कक्षा कक्ष में बच्चों को विज्ञान का नियम बाद में प्रयोग पहले करने को कहा।
डॉ. रौतेला ने कहा कि विज्ञान की कुछ जानकारी हर व्यक्ति में होती है। आओ करके सीखें के फार्मूले का अपना अति जरूरी है। उन्होंने ने शिक्षक शिक्षण कार्य के दौरान बच्चों से सवाल जवाब अनिवार्य रुप से करने को कहा। बताया कि बच्चे शिक्षक के क्लास में आते ही शिक्षक का मूड की पहचान कर लेते है। उत्तराखंड के अधिकांश वैज्ञानिक वर्तमान में विदेशों में विज्ञान पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नवंबर माह में गरुड़ और बागेश्वर विज्ञान मेले का आयोजन किया जाएगा।
जिसमें देश विदेश के वैज्ञानिक बच्चों से रूबरू होंगे। जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने विज्ञान विषय के शिक्षकों से बच्चों में विज्ञान के प्रति अभिरुचि पैदा करने को कहा। उन्होंने कहा कि शिक्षक को अपने ज्ञान को कक्षा कक्ष तक पहुंचाने को कहा। वहां बीआरसी समन्वयक उमेश जोशी, जिला समन्वयक सुमित पांडे, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के जिला समन्वयक अमित, नीरज पंत, दिगंबर सिंह परिहार, डीके नेगी, दलीप भाकुनी गिरीश नेगी आदि मौजूद थे। संचालन डायट के प्राचार्य केएन कांडपाल ने किया।