फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बागेश्वर में 240 हेक्टेअर वन जले

Mon, 02 May 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
विज्ञापन
बागेश्वर में जले जंगल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बागेश्वर। जिले के जंगलों में आग लगने की 46 घटनाओं में 240 हेक्टेअर वन आग की चपेट में आ चुके हैं। आरक्षित वनों में आग लगने की 26 और सिविल वनों में 20 घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में जहां वन संपदा को लाखों का नुकसान हुआ वहीं आग बुझाने में डुंगरी गांव निवासी खिमुुली देवी और छतीना में वन दरोगा गणेश सिंह लस्पाल झुलसने से घायल हुए।
विज्ञापन


एक पुराना मकान भी जंगल की आग की चपेट में आया। इस बार जिले में चीड़ के कई जंगल फायर सीजन से पहले ही आग की चपेट में आ गए थे। पिछले एक पखवाड़े से वनों में लगातार आग के कारण पूरे घाटी वाले क्षेत्र में जबरदस्त धुंध छाई है। बागेश्वर में रविवार को भी पूरे दिन धुंध के कारण सूरज के दर्शन नहीं हुए।

बागेश्वर। जिले के जंगलों में लगी आग थमने का नाम नहीं ले रही है। जिले में 240 हेक्टेअर वन जल चुके हैं। आग से जले चीड़ के पेड़ कई जगह गिर रहे हैं। सड़क किनारे जले पेड़ों से हादसे का खतरा बना हुआ है। 
विज्ञापन


जिले में सबसे अधिक आग लगने की घटनाएं चीड़ के जंगलों में हुई। चीड़ के अधिकतर जंगल आग की चपेट आ चुके हैं। कांडा क्षेत्र में शनिवार की देर रात तक वनों में आग लगी रही। जिन जंगलों में लीसा निकालने के लिए पेड़ों में कट लगाई गई है, उनमें से कई पेड़ आग पकड़ने के कारण धू-धूकर जल रहे हैं।

बागेश्वर से लेकर कमेड़ीदेवी तक कई स्थानों पर आग लगने से पेड़ गिर चुके हैं। एनएच में दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। सड़कों के किनारे खड़े पेड़ों के आग लगने से हादसे का खतरा है। बागेश्वर-कांडा रूट में दर्जनों की संख्या में जले हुए चीड़ के पेड़ हादसों को दावत दे रहे हैं। यदि इन पेड़ों को काटा नहीं गया तो कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। बागेश्वर वन प्रभाग के डीएफओ एमबी सिंह ने बताया कि खतरा बने पेड़ों का शीघ्र छपान कराकर प्रकाष्ठ निस्तारित किया जाएगा। 

बागेश्वर। कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण ने उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वनों की आग से वन्य संपदा को इस साल सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। 

विधायक फर्स्वाण का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश वन आग की चपेट में आ चुके हैं। इस आग से वन्य संपदा के साथ ही वन्य जीवों की भी भारी क्षति हुई है। उन्होंने वन्य संपदा के अधिक नुकसान के लिए वन विभाग और वन निगम में आपसी तालमेल का अभाव बताया है। उनका कहना है कि आग लगने की सबसे अधिक घटनाएं चीड़ के जंगलों में हुई हैं। इन जंगलों में तमाम कारणों से हजारों चीड़ के पेड़ लंबे समय से गिरे हैं।

इन पेड़ों के आग में जलने से करोड़ों का नुकसान हुआ है। यदि समय रहते वन निगम इन पेड़ों को जंगलों से उठा लेता तो संपदा का इतना नुकसान नहीं होता। विधायक का कहना है कि जंगलों की सुरक्षा के नाम पर वन विभाग की ओर से कोई भी ठोस इंतजाम नहीं किए गए। यदि समय रहते ध्यान दिया होता तो करोड़ों की वन्य संपदा का नुकसान नहीं होता। वन विभाग नुकसान के बाद फायर वाचरों की नियुक्ति कर रहा है। उन्होंने केंद्र से उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। 
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें