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देवोत्थान एकादशी आज, मंगल आयोजनों को पुन: गति मिलेगी

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बागेश्वर। देवोत्थान यानी देवउठनी एकादशी का त्योहार आठ नवंबर को मनाया जाएगा। इसे हरिप्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिन से मंगल आयोजनों के रुके रथ को पुन: गति मिल जाती है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित पीतांबर गुरुरानी ने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार महीने के लिए सो जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु के उठने के कारण ही देव जागरण या उत्थान होने के कारण ही इसे देवोत्थान एकादशी कहते हैं। इस दिन उपवास रखने का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि इस दिन तुलसी का उद्यापन होता है। जो लोग इस दिन उद्यापन नहीं कर पाते हैं। वह आठ से 12 नवंबर तक किसी भी दिन उद्यापन कर सकते हैं।
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आज मनायी जाएगी बूढ़ी दिवाली
बागेश्वर। दिवाली के बाद पड़ने वाली एकादशी पर देव उठ जाते हैं। पहाड़ में देवोत्थान एकादशी के दिन बूढ़ी दिवाली मनायी जाती है। पटाखे चलाए जाते हैं। घरों में विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं।
छठ की तरह बूढ़ी दिवाली पर भी अवकाश घोषित करे सरकार
प्रदेश सरकार ने छठ पर्व के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। बैंक और कोषागार भी बंद रहे। देवोत्थान एकादशी के दिन भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाना चाहिए। समाज के सभी त्योहारों को समान दृष्टि से देखा जाना चाहिए। ताकि समाज में आपसी सौहार्द बना रहे। - दुर्गा असवाल, प्रधानाचार्य गायत्री विद्या मंदिर बागेश्वर
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देवोत्थान एकादशी उत्तराखंड के प्रमुख त्योहारों में शुमार है। इस दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाना चाहिए। ताकि नौकरी पेशा लोग भी इस त्योहार को परिवार संग मना सके। छठ पर्व की तरह ही प्रदेश में इस त्योहार पर अवकाश घोषित होना चाहिए। बच्चों को भी इस पर्व के बारे में बताया जाना चाहिए। - लक्ष्मी टाकुली, प्रधानाचार्य सैनिक स्कूल बागेश्वर।
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