कपकोट के गोलना में आंगनबाड़ी भवन की छत से हो रहे रिसाव से बचाव के लिए लगाई गई बाल्टियां। संवाद
बागेश्वर/कपकोट। गोलना गांव में एक ऐसा आंगनबाड़ी केंद्र है, जहां किताबें खोलने से पहले बाल्टी-बर्तन बिछाने पड़ते हैं। कारण 25 साल पुरानी एक जर्जर छत जो हर बरसात में कमरे के भीतर खुद बरसती है। यहां बच्चे छत से टपकते पानी और रिसती दीवारों के बीच अपनी पढ़ाई के दिन गिन रहे हैं।
गोलना गांव के आंगनबाड़ी केंद्र की ये कहानी सिर्फ एक छत की नहीं बल्कि एक पूरी व्यवस्था की छतरी के फटने की कहानी है। जहां बचपन बर्तन लेकर खड़ा है और भविष्य बारिश में भीग रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र में फिलहाल छह बच्चे पढ़ रहे हैं। लेकिन पढ़ाई से पहले उन्हें और कार्यकर्ताओं को रोज ये तय करना होता है कि आज फर्श कहां सूखा रहेगा और बर्तन कहां रखने हैं। बारिश आते ही पूरी जगह तालाब बन जाती है और क्लास बंद हो जाती है। यह केंद्र प्राथमिक विद्यालय गोलना के उस कमरे में संचालित हो रहा है, जिसे कभी कंप्यूटर कक्ष कहा गया था। 25 साल पुराना यह कमरा अब खुद रिटायर हो चुका है लेकिन बच्चों की पढ़ाई इसी में किसी तरह घिसट रही है। गांव के लोगों ने उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है लेकिन आश्वासनों की छत भी अब टपकने लगी है। बच्चे हर बारिश के साथ शिक्षा से और दूर हो रहे हैं।
बरसात होते ही बच्चों को घर भेजना पड़ता है। पंचायत घर गधेरे के पार है, वहां भेजना सुरक्षित नहीं। अधिकारी जानते हैं, पर कुछ नहीं बदला।
उमा गढ़िया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
आंगनबाड़ी केंद्र को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। नए कक्ष का प्रस्ताव बनाया जाएगा।
-डॉ. मंजूलता यादव, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास विभाग