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टूटी हड्डियों को जोड़ रहे खातीगांव के भवान दा

Mon, 30 Nov 2015 12:35 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, बागेश्वर।
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पल्ला कमस्यार क्षेत्र के खातीगांव ग्राम पंचायत के खाइनधार के 66 वर्षीय बुजुर्ग जड़ी-बूटियों से लोगों के टूटी हड्डियों को जोड़ने में जुटे हैं। वह सर्पदंश से पीड़ित लोगों का भी इलाज करते हैं। इस काम को वह 38 साल से कर रहे हैं। खातीगांव के खाइनधान के भवान राम गांव के गरीब परिवारों में शामिल हैं।
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टूटी हड्डियों को जोड़ने का काम उन्होंने खाती गांव निवासी स्व. जंगबहादुर सिंह रावत से सीखा। वह कहते हैं कमेड़ीदेवी, भैैंसूड़ी के बांज के जंगल में पेड़ों पर ढ्यरलगिल नाम की बेल होती है। उसमें लगी फली देखने में छुहारे सी होती है। उसका रंग हरा होता है।

उसे हड़जोजन, शिलाजीत में मिलाकर ओखली में कूटा जाता है। तीनों को गोमूत्र में 12 घंटे तक पकाकर उसमें एक तोला सिंगरप मिलाया जाता है। जब वह आटे के रूप में आ जाता है तो उसे कपड़े में छानकर उसका रस बोतल में रख दिया जाता है।
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दवा को पीड़ित के हाथ, पांव, पसली के हिस्से में लेप किया जाता है। इस दवा से एक महीने में हड्डियां जुड़ जाती हैं। यह कटे, पके, मोच समेत सर्पदंश में भी कारगर साबित होती है। उनके काम में उनकी पत्नी आनंदी देवी, पोता नीरज सहयोग करते हैं।

खातीगांव निवासी केआरसी के जवान राजेंद्र बसेड़ा, जगत सिंह खाती, महेश राम आदि लोगों को भवान दा की दवा से राहत मिली। वह उनकी दवा को अपने पास ही रखते हैं। इस बुजुर्ग वैद्य के पास दूर-दूर से पीड़ित आते हैं। बुलावे पर वह पीड़ितों के घर भी जाते हैं। वह सेवा का दाम नहीं मांगते।

वह कहते हैं कि हमारे आसपास काफी जड़ी-बूटियां हैं लेकिन जानकारी के अभाव में वह बर्बाद हो रही हैं। यदि सरकार जिला स्तर पर जड़ी-बूटी शोध संस्थान खोले, जड़ी-बूटियों की खेती करवाए तो इससे रोजगार मिलेगा, पलायन पर भी अंकुश लगेगा।
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