टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग निर्माण संघर्ष समिति की बैठक में रेल मार्ग की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया और आंदोलन तेज करने की धमकी दी। यहां तहसील परिसर में हुई बैठक मेें वक्ताओं ने कहा कि बागेश्वर के लिए टनकपुर से रेल मार्ग बनाने की पहल ब्रिटिशकाल में शुरू हो गई थी, लेकिन बाद में यह मामला अधर में लटक गया।
आजादी के बाद इसके लिए मात्र आश्वासन मिलते रहे। रेल मार्ग की मांग को लेकर बागेश्वर में 2004 से लगातार आंदोलन हो रहा है। वक्ताओं ने कहा कि पड़ोसी देश चीन ने सीमा पर सड़क और रेल लाइनों का जाल बिछा दिया है। इससे भारत के समक्ष सामरिक चुनौती खड़ी है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि यहां के सामरिक महत्व को समझते हुए पिछली सरकार ने बागेश्वर टनकपुर और ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल मार्ग को राष्ट्रीय परियोजना में शामिल किया, लेकिन अभी तक धन नहीं मिलने के कारण मार्ग का निर्माण नहीं हो सका है। वक्ताओं ने रेल मार्ग की मांग केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु के सम्मुख रखने के लिए मुख्य मंत्री हरीश रावत का आभार जताया।
इस मौके पर जिले की अन्य समस्याओं पर भी चर्चा हुई। जिला अस्पताल में ब्लड बैंक और सभी तहसीलों में सब रजिस्ट्रार के रिक्त पदों को भरने की मांग की। आंदोलनकारियों ने नारेबाजी की। इस मौके पर संघर्ष समिति की अध्यक्ष नीमा दफौटी, महासचिव खड़क राम आर्य, प्रवक्ता हयात सिंह मेहता, संरक्षक प्रवीण सिंह दफौटी, केवल सिंह डियोढ़ी, प्रताप सिंह गढ़िया, महेंद्र सिंह पिलख्वाल आदि उपस्थित थे।