बागेश्वर। राज्य गठन के 16 साल बाद भी ट्यांकोट के पास बह रही भैंसुड़ी नदी के ऊपर 30 मीटर लंबी पुल नहीं सकी है। ग्रामीण नेताओं के आगे गिड़गिड़ाते रहे लेकिन सभी हां-हां की राजनीति कर ग्रामीणों को भुलावे में रखते रहे।
बरसात में नदी के उफनाने से ग्रामीणों की सांसे अटक जाती हैं जबकि जाड़े के मौसम में नदी में पत्थरों पर पानी के निशान से जोर की फिसलन रहती है। नाराज ग्रामीणों ने अब विधानसभा चुनाव में नेताओं का जवाब तलब करने का बनाया मन बना लिया है।
जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी दूर बसे ट्यांकोट गांव के पास बह रही भैंसुड़ी नदी में पैदल पुल बनाने की मांग गांव के बसने से उठ गई थी। आजादी प्राप्ति के काफी बाद तक ग्रामीण यही सोचते रहे कि अभी तो देश आजाद ही हुआ है।
संसाधनों की भारी कमी है। कुछ इंतजार करना पड़ेगा। अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद ग्रामीणों के अरमान बढ़े। उन्हें उम्मीद हुई कि अब नदी में शीघ्र ही पुल बन जाएगा। राज्य बनने के 16 साल भी निकल गए। कई सरकारें आईं और कई नेताओं ने आश्वासन दिए लेकिन सदियों पुरानी मांग पूरी नहीं हो सकी।