बड़े भाई को जन्मदिन के तोहफे में मिले शतरंज के बोर्ड ने सद्भव रौतेला को एशिया का नंबर वन खिलाड़ी बना दिया। बागेश्वर के त्यूनरा का रहने वाला आठ साल केा प्रदेश के साथ ही देश का नाम रोशन किया है। सद्भव के पिता बीएस रौतेला ने बताया कि करीब 10-12 साल पहले उन्होंने त्यूनरा में घर बनाया था। तब जिले में इतनी चहल पहल नहीं थी और उनका घर एकांत में था। इसी बीच उन्होंने बड़े बेटे सद्भव के बड़े भाई सक्षम का जन्म दिन मनाया। जन्म दिन पर सक्षम के ममेरे भाई जीवन भाकुनी ने उन्हें बर्थ-डे गिफ्त के रूप में शतरंज तोहफे में दिया। एकांत में घर होने की वजह से सक्षम शतरंज में रम गया।
बड़े भाई को शतरंज का खेल खेलते देख सद्भव ने हाथी घोड़े की चाल सीखी। बाद में सद्भव ही सक्षम का साथी खिलाड़ी बना। जिम कार्बेट इंटरनेशनल स्कूल में तीसरी क्लास के छात्र सद्भव ने पहली बार चार साल की उम्र में नुमाइश खेत में हुए टूर्नामेंट में पहला मैच खेला था। उसकी इस उपलब्धि पर परिजनों, स्कूली साथियों में हर्ष का माहौल है। सद्भव का बड़ा भाई सक्षम भी शतरंज का बड़ा खिलाड़ी हैं। जो कि इंटरनेशलन मास्टर बनने की ओर अग्रसर है। सद्भव बड़े भाई और माता-पिता को आदर्श मानता है।
माता-पिता ने घर-जमीन बेचकर दिलाई ट्रेनिंग
सद्भव को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए पिता बीएस रौतेला और मां किरन रौतेला ने काफी त्याग किया है। रौतेला ने बताया कि बच्चों को शतरंज का खेल सिखाने के लिए महंगे कोच हायर किए। उत्तराखंड में शतरंज का खेल लोकप्रिय नहीं होने पर उन्हें बिहार, चेन्नई और रशिया के कोचों से ट्रेनिंग दिलाई। ये कोच प्रतिदिन के हिसाब से फीस लेते थे जो कि उन्हें काफी महंगा पड़ता था। इस फीस को चुकाने के लिए उन्हें बागेश्वर का एक मकान और हल्द्वानी के एक-दो प्लाट भी बेचने पड़े। उनके व्यवस्त होने पर मां किरन रौतेला ही बच्चों को देश-विदेश के टूर्नामेंटों में साथ जाती थी। इसके बाद दिन रात कड़ी मेहनत कर बच्चों से यह मुकाम पाया।