निवर्तमान सीएम हरीश रावत ने राज्य के हर ब्लॉक में पांच विद्यालयों को मॉडल स्कूल बनाने की घोषणा की थी। उनकी घोषणा नए शिक्षा सत्र में रंग ले आई है। प्राइमरी स्कूलों में प्रवेश शुरू हो चुका है। जूनियर और 9वीं की कक्षा में एक अप्रैल, जबकि अन्य कक्षाओं में हाईस्कूल का परीक्षाफल आने के बाद प्रवेश शुरू होगा।
डीएम के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने स्कूलों के संचालन की तैयारियां पूरी कर ली हैं। वहीं, मॉडल स्कूलों में कक्षावार शिक्षकों की तैनाती और अन्य सुविधाएं गैर मॉडल स्कूलों के भविष्य पर खतरा मंडराने की आशंका बनी हुई है। उदाहरण के लिए यहां राजकीय मॉडल स्कूल बागेश्वर प्रथम को लें तो यहां से राजकीय प्राइमरी पाठशाला बागेश्वर द्वितीय की दूरी करीब 50 मीटर है। मॉडल स्कूल के छह शिक्षकों के सापेक्ष राजकीय प्राइमरी स्कूल में सिर्फ दो ही शिक्षिकाएं ही तैनात हैं।
राजकीय मॉडल स्कूल बागेश्वर प्रथम की स्थिति
- भवनों में रंगरोगन और लघु मरम्मत पूर्ण।
- बच्चों की संख्या 59 बालक 65 बालिकाएं।
- प्रधानाध्यापक समेत कुल छह शिक्षक।
- कंप्यूटर शिक्षक एक समेत सभी की अच्छी योग्यता।
- कक्षा कक्ष और कार्यालय कक्ष पर्याप्त।
- दो कंप्यूटर मशीनों में से एक खराब।
- खेल मैदान और सामग्री उपलब्ध।
- पीने का पानी उपलब्ध।
- किचन गार्डन है।
- बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर उपलब्ध।
- एमडीएम भवन और दो भोजन माताएं कार्यरत।
- बालक, बालिकाओं और शिक्षकों के लिए शौचालय बने हैं।
पिछले शिक्षा सत्र में विद्यालय में कुल 95 बच्चे पंजीकृत थे। वह यहां तीन साल से अकेले अध्यापन करा रही थीं। इस बार मॉडल स्कूल बनते ही पांच और शिक्षक पहुंच गए हैं। मॉडल स्कूल बनने के साथ ही बच्चों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। बच्चों को बॉक्स फाइल, चार्ट और दीवार पत्रिका बनाने के अलावा उन्हें ज्ञानवान बनाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
- बसंती हरड़िया, प्रधानाध्यापिका (राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित)।
राजकीय प्राइमरी पाठशाला बागेश्वर द्वितीय की स्थिति
- भवनों में रंगरोगन लंबे समय से नहीं हुआ है।
- बच्चों की संख्या 32 बालक, 15 बालिकाएं।
- प्रधानाध्यापिका और एक अन्य शिक्षिका दोनों की अच्छी योग्यता।
- कक्षा कक्ष और कार्यालय कक्ष पर्याप्त।
- दो कंप्यूटर और दोनों ही खराब।
- खेल सामग्री है पर मैदान नहीं।
- पीने का पानी उपलब्ध है।
- किचन गार्डन नहीं।
- कक्षा चार और पांच तक के बच्चों के लिए ही फर्नीचर उपलब्ध।
- एमडीएम भवन और दो भोजन माताएं।
- बालक-बालिकाओं के लिए पर्याप्त शौचालय।
विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अभिभावकों से संपर्क किया जाएगा। मॉडल स्कूल की तरह ही विद्यालय में कक्षावार शिक्षक हों तो बच्चे और बेहतर बन सकते हैं। फिर भी बच्चों को प्रतियोगी बनाने में वह कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगी। बच्चे दीवार पत्रिका, बॉक्स फाइल और चार्ट बनाने में निपुण हो रहे हैं।
- अंजना आर. सिंह, प्रधानाध्यापिका।