बागेश्वर के ब्रिमद्यो में रिंगाल की डलिया बनाते बाली राम आगरी। संवाद न्यूज एजेंसी
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बागेश्वर। जिले में स्थानीय संसाधनों के उपयोग से स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। इस बात को ब्रिमद्यो गांव के बाली राम आगरी ने सही साबित कर दिखाया है। वह करीब 20 साल से रिंगाल के उत्पाद बनाकर आजीविका चला रहे हैं। खेतीबाड़ी के प्रति लोगों का रुझान घटने के बावजूद वह अपने कारोबार से घर-परिवार का खर्चा आसानी से चला रहे हैं। क्षेत्र के गांवों में उनके बनाए उत्पादों की अच्छी मांग है।
गरुड़ तहसील मुख्यालय से 17 किमी दूर बसे ब्रिमद्यो गांव के रहने वाले बाली राम को रिंगाल के उत्पाद बनाने का हुनर विरासत में मिला। महज 14 साल की उम्र से वह स्वरोजगार करने लगे थे। वह रोजाना जंगल से रिंगाल काटकर लाते, फिर घर पर डलिया, सूप, मोस्टे आदि खेतीबाड़ी में उपयोग होने वाले सामान तैयार करते। अपने बनाए उत्पादों को वह स्वयं ही गांव-गांव जाकर बेचते थे। धीरे-धीरे उनके बनाए उत्पादों की मांग दूरदराज के गांवों में भी होने लगी। अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया, द्वाराहाट के लोग भी उनसे सामान मंगाने लगे। काम बढ़ने लगा तो उनकी पत्नी भी हाथ बंटाने लगीं। वर्तमान में भी उनकी पत्नी और बेटी रिंगाल के उत्पाद बनाने में उनकी मदद करती हैं।
पिछले 10-15 सालों में क्षेत्र में भी खेती के प्रति लोगों का मोह भंग हुआ है। इसके कारण उनका कारोबार भी प्रभावित हुआ लेकिन अब भी उन्हें रिंगाल के उत्पादों से ठीकठाक कमाई हो जाती है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि वर्तमान में भी वह रोजाना तीन से चार डलिया, सूप का निर्माण कर लेते हैं। गांव-गांव जाकर बेचने के अलावा उत्तरायणी, कोट भ्रामरी आदि मेलों में भी वह अपने बने उत्पाद बेचने ले जाते हैं। मेलों में उनका बनाए उत्पादों की अच्छी बिक्री हो जाती है।
मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को साधा जा सकता है। अगर काम मंदा हो तो अधिक मेहनत करनी पड़ती है। अधिक दूर के गांवों तक सामान लेकर जाना पड़ता है। कहा कि महानगरों में जाकर रोजगार के लिए धक्के खाने के बजाय अगर युवा अपने गांव में रहकर ही रोजगार करने की ठान ले तो महीने में 15 से 20 हजार रुपये की कमाई कर बेहतर तरीके से अपने परिवार का पालन कर सकता है। - बाली राम आगरी हस्तशिल्पी