गरुड़ (बागेश्वर)। बैजनाथ धाम और बैजनाथ की कृत्रिम झील देखने रोजाना तमाम सैलानी आ रहे हैं लेकिन जहां एक ओर बैजनाथ धाम में नागर शैली में बने मंदिरों को देख जहां पर्यटक अति उत्साहित हो रहे हैं, वहीं बैजनाथ कृत्रिम झील के किनारे स्थानीय लोगों का कपड़े धोना उन्हें नहीं भा रहा है।
कौसानी का पर्यटक सीजन आजकल जोरों पर है। कौसानी आने वाला हर पर्यटक बैजनाथ धाम की महत्ता और बैजनाथ कृत्रिम झील को देखने आता है। बैजनाथ धाम में चंदवंशीय राजाओं के कार्यकाल में बने नागर शैली के मंदिर आकर्षण के केंद्र हैं। बैजनाथ मुख्य मंदिर में शिव, पार्वती को एक ही मंदिर में देख पर्यटक फूले नहीं समाते।
वहीं बैजनाथ कृत्रिम झील में स्थानीय लोगों का कपड़ा धोना पर्यटकों को नहीं भा रहा है। पर्यटक भी कई बार लोगों से झील के किनारे कपड़े न धोने के लिए कहते हैं। बैजनाथ की प्रधान अनीता गोस्वामी का कहना है कि पर्यटक केेंद्र बैजनाथ से लगी ग्राम पंचायत में सरकार की कोई पेयजल योजना नहीं है।
इसलिए गांव के लोग गोमती नदी का पानी पीने को मजबूर हैं। झील की देखरेख का जिम्मा संभाले बैजनाथ सिंचाई उपखंड के एई बीसी नैनवाल ने बताया कि कपडे़ धोने से झील का पानी प्रदूषित हो रहा है। इसलिए ग्रामीणों से झील के किनारे कपड़े न धोने के लिए कई बार कहा गया लेकिन समस्या नहीं सुलझ सकी।