बागेश्वर में प्रदर्शन करते रेल लाइन निर्माण संघर्ष समिति के सदस्य।
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बजट में टनकपुर से बागेश्वर रेल मार्ग निर्माण को लेकर कोई चर्चा नहीं होने से रेल संघर्ष समिति में गहरी नाराजगी है। संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। इस अवसर पर सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया।
रविवार को तहसील परिसर में आयोजित रेल मार्ग निर्माण संघर्ष समिति की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि टनकपुर से बागेश्वर के लिए रेल मार्ग का सर्वे ब्रिटिश काल से है। जनता की मांग पर 2010 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने 4300 करोड़ की प्रस्तावित इस योजना को राष्ट्रीय परियोजना में शामिल किया, लेकिन बात सर्वेक्षण से आगे नहीं बढ़ पाई।
इस वर्ष इस परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद लगाई गई थी। इस पर कोई जिक्र तक सरकार ने नहीं किया। समिति के पदाधिकारियों ने इसे पर्वतीय क्षेत्र की उपेक्षा बताया। बैठक में सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
समिति के महासचिव खड़क राम आर्या ने कहा कि रेल के लिए अब बागेश्वर के साथ ही अल्मोड़ा, चंपावत और पिथौरागढ़ जिलों की जनता को एकजुट कर संघर्ष शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन करने वालों में अध्यक्ष नीमा दफौटी, हयात सिंह मेहता, प्रताप सिंह गढ़िया, केशवानंद जोशी, डुंगर सिंह, महेंद्र सिंह, दीवानी राम, मनोज राम, मनीष, सरस्वती, मंजू, लक्ष्मी आदि शामिल थे।