पिछले पांच साल में बागेश्वर में 119 किलो 187 ग्राम चरस पकड़ी गई है। वहीं इस दौरान स्मैक तस्करी के 58 मामले सामने आए। पुलिस और सामाजिक संगठनों के नशे के खिलाफ जागरूकता और अभियान के बावजूद जिले में नशा तस्करी बढ़ती ही जा रही है।
धार्मिक और साहसिक पर्यटन के लिए विख्यात बागनाथ की नगरी की नई पहचान नशे के गढ़ के रूप हो रही है। पुलिस विभाग के आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। पिछले पांच साल में बागेश्वर में 119 किलो 187 ग्राम चरस पकड़ी गई है। वहीं इस दौरान स्मैक तस्करी के 58 मामले सामने आए। पुलिस और सामाजिक संगठनों के नशे के खिलाफ जागरूकता और अभियान के बावजूद जिले में नशा तस्करी बढ़ती ही जा रही है। 2023 में अब तक 13 किलो 160 ग्राम चरस पकड़ी जा चुकी है।
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एसपी कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार इन पांच सालों में चरस तस्करी के 89 मामले सामने आए। 90 आरोपी पकड़े गए। पिछले पांच साल में अब तक स्मैक तस्करी के 58 मामलों सामने आए। 216.63 ग्राम स्मैक के साथ 64 आरोपी पकड़े गए।
चरस और स्मैक तस्करी को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।अक्सर देखा गया है कि उत्तरायणी के मेले के दौरान चरस तस्करी के मामले बढ़ते है। पूर्व में मेले में सामान बेचने के लिए आए बाहरी व्यापारियों की संलिप्तता सामने आई है। इस पर विशेष नजर रखी जाएगी। -अक्षय प्रह्लाद कोंडे, पुलिस अधीक्षक, बागेश्वर
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चरस तस्करी के लिए कुख्यात हुआ कपकोट
जिले का कपकोट चरस तस्करी के लिए कुख्यात हो चुका है। जिले में जो भी चरस पकड़ी जाती है, वह कपकोट क्षेत्र से आती है। चरस तस्करी के सबसे अधिक मामले कपकोट में ही पकड़े जाते हैं। जो मामले जिला मुख्यालय या अन्यत्र पकड़े जाते हैं, इन मामलों में भी कपकोट से ही चरस लाए जाने की बात सामने आती है।
साल दर साल पकड़ी गई चरस
वर्ष 2019 21 किलो 645 ग्राम
वर्ष 2000 41 किलो 24 ग्राम
वर्ष 2021 11 किलो 359 ग्राम
वर्ष 2022 31 किलो 999 ग्राम
वर्ष 2023 (अब तक) 13 किलो 160 ग्राम
साल दर साल पकड़ी गई स्मैक
वर्ष 2019 16.59 ग्राम
वर्ष 2020 77.42 ग्राम
वर्ष 2021 78.62 ग्राम
वर्ष 2022 10 ग्राम
वर्ष 2023 34 ग्राम