बागेश्वर। भूकंप की दृष्टि यह जिला सबसे खतरनाक जोन पांच में आता है। चाइना प्लेट भी यहीं से होकर गुजरती है। अगर कभी यहां रिएक्टर स्केल पर छह से अधिक तीव्रता के भूकंप के झटके आ गए तो यहां के सैकड़ों घर ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएंगे। नगर से लेकर उच्च हिमालयी क्षेत्र से जुड़े गांवों में बने सैकड़ों घर भूूकंप के लिहाज सुरक्षित नहीं हैं। इतना सब होने के बावजूद अधिकतर निजी भवनों के निर्माण में भूकंप अवरोधी तकनीक नहीं अपनाई जा रही है।
नगाधिराज हिमालय की गोद में बसे इस जिले के अधिकतर घर बगैर भूकंपरोधी तकनीक से बने हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों पूर्व बने अधिकतर मकानों की बुनियाद डेढ़ से दो फीट से अधिक नहीं है। मौजूदा समय में भी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर घर पुरानी तकनीक से ही बनाए जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र में संपन्न लोग तो भूकंप अवरोधी तकनीक से मकानों का निर्माण कर रहे हैं जबकि सामान्य तबके के लोग निर्माण में इस तकनीक को नहीं अपना पा रहे हैं।
बागेश्वर नगर, नगर पंचायत कपकोट, कपकोट, कांडा, दुग नाकुरी, गरुड़, काफलीगैर तहसील, शामा उप तहसील में वर्षों पूर्व बने कई भवन जीर्णशीर्ण हैं। गरीब लोगों के पास घरों को भूकंपरोधी बनाने के लिए पैसा भी नहीं है। बीपीएल परिवारों को मिलने वाले इंदिरा आवास, पंडित दीनदयाल उपाध्याय आवास, अटल आवास, समाज कल्याण विभाग की ओर से भूमिहीनों को मकान निर्माण के लिए कम पैसा मिलने के कारण अधिकतर लाभार्थी भूकंपरोधी तकनीक से मकान का निर्माण नहीं कर पा रहे हैं।
बागेश्वर। नगर पालिका बागेश्वर, नगर पंचायत कपकोट समेत ग्रामीण क्षेत्रों में जीर्णशीर्ण भवनों की गणना नहीं हो सकी है। नगर पालिका परिषद के ईओ ईश्वर सिंह रावत ने बताया कि जीर्णशीर्ण मकानों की सूची शीघ्र तैयार की जाएगी।
बागेश्वर। भूकंप की दृष्टि से अतिसंवेदनशील इस जिले में कपकोट तहसील के अलावा कहीं भी भूकंप मापी यंत्र नहीं लगा है। आपदा प्रबंधन विभाग को रिएक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता और उसका केंद्र जानने के लिए दिल्ली से संपर्क करना पड़ता है।
बागेश्वर। आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल ने बताया कि शासन के निर्देेश पर चार इंजीनियर सरकारी स्कूलों, अस्पतालों आदि सरकारी भवनों के सर्वेक्षण के लिए यहां जुटे हैं। इंजीनियर भवनों का सर्वेक्षण करके अपनी रिपोर्ट डीएम के माध्यम से शासन को देंगे। उन्होंने बताया कि भूकंप से होने वाली क्षति से निपटने, खोज बचाव के लिए अधिकारियों का मॉकड्रिल हो चुुका है। इसके अलावा ग्राम समितियों का गठन भी हो चुका है।