- भागीरथी नाले में बहता साफ पानी।
- फोटो : अमर उजाला
भागीरथी गधेरे की स्वच्छता को लेकर चला अभियान सफल रहा। अभियान से नगर के लोग जागरूक हुए तो भागीरथी गधेरा भी अब साफ नजर आने लगा है और ऐसा वर्षों बाद देखने को मिला है।
बागेश्वर में सरयू-गोमती के साथ ही भागीरथी गधेरे का भी विशेष धार्मिक महत्व है। इसे विलुप्त सरस्वती भी कहा जाता है। शहरीकरण के बाद भागीरथी गधेरा पूरी तरह से दूषित हो गया था। अमर उजाला ने सरयू की स्वच्छता के बाद भागीरथी गधेरे की सफाई को लेकर जागरूकता अभियान चलाया।
समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर के जागरूक लोगों ने भागीरथी गधेरे में सफाई कार्य शुरू किया। तत्कालीन डीएम मंगेश घिल्डियाल ने अन्य अधिकारियों के साथ स्वयं गधेरे में उतरकर कचरा साफ किया था। हर रविवार को गधेरे में सफाई अभियान चलाया गया। दशकों से जमा कचरे की जेसीबी से सफाई की गई। इस अभियान के बाद अब भागीरथी गधेरा नए स्वरूप में है, लेकिन भागीरथी गधेरे की स्वच्छता के लिए इस क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण की पुख्ता व्यवस्था होना जरूरी है। कई स्थानों पर कूड़ेदान नहीं होने या सड़कों से दूर होने के कारण लोग कूड़ा कूड़ेदान के बाहर फेंक रहे हैं। यह कूड़ा बिखरकर गधेरे में चला जाता है।
भागीरथी गधेरा अब काफी हद तक साफ हो चुका है। जागरूक लोग अब गधेरे में कूड़ा नहीं डालते हैं। जो गंदगी नजर आती है, उसे साफ किया जाता है। युवा शहर और यहां की धार्मिक महत्व की नदियों की सफाई के लिए तत्पर हैं।
- धीरेंद्र परिहार।
पहले भागीरथी गधेरे से दुर्गंध आती थी। सफाई के बाद पिछले छह माह से कचरे की समस्या समाप्त हो गई है। अब लोग यहां कूड़ा करकट नहीं डालते हैं। पहली बार भागीरथी का पानी साफ नजर आ रहा है।
देश दीपक सिंह मलड़ा।
जागरूकता अभियान और बड़े स्तर पर चले सफाई अभियान के बाद लोगों ने नदी-नालों में कूड़ा डालना बंद कर दिया है। कुछ लोग सड़क किनारे रखे कूड़ेदानों के बजाय सड़क पर ही कूड़ा डाल रहे हैं। उन पर नजर रखने की जरूरत है।
- हरीश कालाकोटी।
शहर और यहां की पवित्र नदियों को साफ रखने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। हर व्यक्ति यदि घरों और दुकानों का कूड़ा कूड़ेदानों में डालेगा तो गंदगी होगी ही नहीं। आज सफाई व्यवस्था में काफी सुधार है।
- रमेश कांडपाल।