बागेश्वर। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान घर लौटे बास्ती गांव के एक ग्रामीण पर जंगली सुअर ने हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से जख्मी ग्रामीण को नवयुवक मंगल दल के सदस्य डोली की मदद से गांव तक लाए। वहां से उसे 108 की मदद की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांडा लाया गया। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से पीड़ित को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
बास्ती गांव के ग्राम प्रधान केदार सिंह महर से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार की शाम ग्रामीण पान सिंह (40) पुत्र लछम सिंह गांव से अपने घर की ओर लौट रहा था। रास्ते में पड़ने वाले रोस्याड़ी के जंगल में जंगली सुअर ने उस पर हमला कर दिया। पान सिंह ने सुअर के हमले से बचने की कोशिश की, लेकिन सुअर ने उसके एक पैर को जख्मी कर दिया जिससे वह बेहोश हो गया। वह पूरी रात और रविवार की दोपहर तक इसी हालत में जंगल में पड़ा रहा।
रविवार की शाम को गांव के नवयुवक मंगल दल के युवाओं ने उसे जख्मी हालत में देखा। युवक मंगल दल के सदस्यों ने तत्काल पान सिंह को डोली की मदद से गांव तक पहुंचाया। वहां से 108 की मदद से उसे रात को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांडा में भर्ती कराया गया। ग्रामीण के घुटने में गहरा जख्म था और हड्डी भी बाहर निकली थी। डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर किया। जिला अस्पताल से भी उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है।
युवाओं के कार्य की हो रही सराहना
बागेश्वर। जंगली सुअर के हमले में जख्मी ग्रामीण को नवयुवक मंगल दल के हेमंत सिंह, किशन सिंह, हिमांशु, देवेंद्र सिंह, दीपक सिंह आदि ने डोली की मदद से करीब तीन किमी दूर गांव तक पहुंचाया जहां से ग्रामीण और युवा उसे लेकर अस्पताल तक पहुंचे। युवाओं के इस कदम की ग्राम प्रधान और अन्य ग्रामीणों ने सराहना की है।
गांव से दूर बंजर मकान में रहता था पान सिंह
बागेश्वर। ग्राम प्रधान ने बताया कि सुअर के हमले में जख्मी पान सिंह हिमाचल प्रदेश में नौकरी करता था। वह पिछले वर्ष कोरोना काल में घर लौटा था। वह गांव में अकेला रहता था। अपना घर नहीं होने के कारण वह बास्ती और सनगाड़ गांवों के बीच में रोस्याड़ी जंगल के पास पुराने बंजर पड़े मकान में रहता था। शनिवार की शाम वह गांव से मजदूरी कर घर को लौट रहा था। इसी दौरान जंगली सुअर ने उस पर हमला बोल दिया।