अपर जिला सत्र न्यायाधीश शमशेर अली ने दिव्यांग युवती से दुराचार के आरोपी को 10 साल के कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। घटना के चार सह आरोपियों को गर्भ गिराने का प्रयास करने का दोषी पाते हुए एक-एक साल की सजा सुनाई है। मामले के अनुसार एक वर्ष पूर्व जिले के मालता क्षेत्र में एक युवक ने 24 साल की दिव्यांग युवती से दुराचार किया। पेट में दर्द की शिकायत पर जब परिजन उसे जिला अस्पताल लाए थे तो दिव्यांग युवती पांच माह की गर्भवती निकली।
इसका पता चलने पर मुख्य आरोपी मदन सिंह के परिजनों भगवत सिंह, पुष्पा देवी, गोपा तथा दान सिंह ने दिव्यांग पीड़िता का गर्भ गिराने का प्रयास किया। इस मामले में युवती के पिता ने बागेश्वर कोतवाली में मदन सिंह सहित चार अन्य के खिलाफ दुराचार करने और गर्भपात कराने के प्रयास का मामला दर्ज कराया। यह मामला अपर जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत में चला। डीजीसी आबिद हसन और एडीजीसी चंचल पपोला ने अदालत में सात गवाह पेश कराए।
इस मामले की सुनवाई के बाद बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश शमशेर अली ने फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी मदन सिंह मलड़ा को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा और 20 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियुक्त को अर्थदंड नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सह अभियुक्त भगवत सिंह, पुष्पा देवी, गोपा तथा दान सिंह को जबरन गर्भपात कराने के प्रयासों में दोषी पाया गया। उक्त चारों को एक-एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। आरोपी इस समय जेल में है, जबकि पीड़िता से जन्मा बच्चा मां के पास है।