बागेश्वर के भागीरथी क्षेत्र में कूड़ेदान के बजाय बाहर सड़क की नाली में फैंका गया कूड़ा।
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नगर और यहां की धार्मिक महत्व की नदियों को स्वच्छ बनाने की मुहिम को कुछ लोग पलीता लगा रहे हैं। घरों का कूड़ा कूड़ेदानों के बजाय सड़कों या नालियों में फेंक रहे हैं। जिला अस्पताल के समीप कई दुकानों का कूड़ा-करकट कूड़ेदावन के बजाय भागीरथी नाले में डाला जा रहा है। शिव की भूमि और मार्कंडेय ऋषि की तपस्थली होने के कारण बागेश्वर का विशेष धार्मिक महत्व है। इसके बावजूद लोग घरों का कचरा जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी सरयू-गोमती और विलुप्त सरस्वती मानी जाने वाली भागीरथी गधेरे में डाल रहे हैं।
तमाम तरह के जागरूकता अभियान चलाने का असर कुछ लोगों पर अभी नहीं हुआ है। लोगों की आदत में शुमार नहीं होने से अभी भी अधिकांश लोग घरों से कूड़ा करकट एकत्र कर सड़क या सड़क की नाली में फेंक रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ दुकानदार भी स्वच्छ भारत अभियान को पलीता लगा रहे हैं। नगरपालिका की ओर से सभी दुकानों में एक-एक कूड़ेदान दिया गया है।
इसके बावजूद कुछ दुकानदार कूड़ा-करकट नदी किनारे डाल रहे हैं। जिला अस्पताल के समीप कुछ मेडिकल स्टोरों की दवाइयों के रेपर और खाली पैकेट भी भागीरथी नाले में फेंके गए हैं। यह कचरा 50 मीटर आगे सरयू-गोमती संगम पर पहुंचता है। लोगों की इस नासमझी के कारण जहां एक ओर नदियों का पानी प्रदूषित हो रहा है वहीं लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं।