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कलाकारों ने निखारा मां नंदा-सुनंदा का स्वरूप

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कोट भ्रामरी मंदिर में देवी अवतरित होते - फोटो : GARUD
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बागेश्वर। कोरोना महामारी के कारण धूमधाम से मनाया जाने वाला नंदा महोत्सव इस वर्ष परंपरा निभाने के लिए सादगी पूर्वक मनाया जा रहा है। । रामलीला समिति के कोषाध्यक्ष कंचन साह ने बताया कि मां नंदा सुनंदा की मूर्तियों का निर्माण पूरा हो गया है। नंदाष्टमी के अवसर पर
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बुधवार सुबह पांच बजे पंडित गोकुलानंद जोशी विधिवत मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए महोत्सव आयोजन समिति ने लोगों के मां नंदा-सुनंदा की पूजा में आने पर प्रतिबंध लगाया है। दिन में कथावाचन और कन्या पूजन किया जाएगा। 27 अगस्त को गंगा आरती और 28 अगस्त को शाम पांच बजे बह्मकपाली पत्थर के पास मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा।
मवई से लाए कदली वृक्ष, नंदा को गहनों से सजाया
गरुड़ बागेश्वर। कोट भ्रामरी मेला कमेटी और जखेड़ा के ग्रामीण कोट भ्रामरी मेला कमेटी के अध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट और जखेड़ा के परिहार वंशज के प्रमुख ईश्वर परिहार के नेतृत्व में बाजे गाजों के साथ मवई गांव से कदली वृक्ष लाए। कदली वृक्ष के साथ मेला कमेटी के सचिव हरीश रावत, व्यापार संघ डंगोली के अध्यक्ष गोविंद राणा, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवेंद्र परिहार, गोकुल परिहार आदि चले रहे थे। इससे पूर्व राजस्व पुलिस भगरतोला गांव के रंजीत सिंह बोरा के घर से नंदा के लाखों की लागत के गहने भारी सुरक्षा व्यवस्था के साथ मंदिर पहुंचे। मंदिर के पुजारियों ने नंदा को गहनों से सजाया।
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त्रियुगी नारायण मंदिर में हुई गौरा-महेश्वर की पूजा
बागेश्वर। जिला मुख्यालय के त्रियुगी नारायण मंदिर में मंगलवार को महिलाओं ने सांतू-आठूं पर्व में गौरा-महेश्वर की पूजा की। शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से शुरू सातूं-आठूं की पिछले साल तक धूम रहती थी। इस बार कोरोना ने पर्व को फीका कर दिया है।

बागेश्वर में बनी मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : BAGESHWAR

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