देश की सीमाओं को बचाने में हमेशा अग्रणी रहे बागेश्वर जिले का उल्लेखनीय योगदान रहा है। अब जिले में सेना के 11500 पेंशनर रह रहे हैं जिनमें से 59 लोग वीरता पदक प्राप्त कर चुके हैं। इनमें सात लोग वीर चक्र से सम्मानित हैं। आजादी के बाद यहां के 183 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है।
सेना में जाकर देश की सेवा करना यहां के लोगों का मुख्य पेशा रहा है। बागेश्वर से अधिकतर सैन्य परिवारों का मैदानों को पलायन होने के बावजूद अभी भी सेना के करीब 11500 पेंशनर यहां रह रहे हैं। तीन हजार से अधिक विरांगनाएं हैं।
जिले के सेवारत सैनिकों की संख्या करीब दस हजार है। बागेश्वर के सैनिक, अर्धसैनिकों ने सशस्त्र सेनाओं में रहकर सेवाकाल में विभिन्न युद्ध, ऑपरेशनों में पराक्रम का परिचय दिया है। विभिन्न पदकों से सम्मानित 58 सैनिक, उनके आश्रित अभी भी यहां रह रहे हैं।
आजादी के बाद देश की सीमाओं को बचाने के लिए बागेश्वर के 183 सैनिक सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। 1962 के चीन युद्ध में 21, 1665 के पाक युद्ध में 36, 1971 के पाक युद्ध में 24, इसके बाद विभिन्न सीमाओं पर चले ऑपरेशन ब्लू स्टार, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन पराक्रम, ऑपरेशन विजय में 51 जवानों ने शहादतें दी हैं।
सात वीर चक्र, 41 लोगों को सेना मेडल
जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में सात वीर चक्र, 41 सेना मेडल, नौ मैंशन इन डिस्पैच, तीन अशोक चक्र तृतीय, छह शौर्य चक्र विजेता रजिस्टर्ड हैं। इनमें छह सेवारत, 33 पूर्व, 16 विधवाएं, चार अन्य हैं।
दिवंगत हो चुके हैं अधिकतर वीर चक्र विजेता
जिले में रजिस्टर्ड वीर चक्र विजेताओं में स्व. सिपाही मंगल सिंह कुलसीवी 1948 पाक युद्ध, स्व. नायब सूबेदार धन सिंह किटौली 1948 पाक, स्व. कैप्टन चंद्र सिंह ककड़ीगैर 1965 पाक, स्व. हवलदार शंकर दत्त स्याकोट 1971 पाक, स्व. सिपाही खड़क सिंह सूपी 1971 पाक, स्व. सूबेदार मेजर नंदन सिंह परमाटी 1971 पाक, नायब सूबेदार गंगा सिंह कपूरी 1971 पाक युद्ध शामिल हैं।