बागेश्वर। सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर की अदालत ने बैंक कर्मचारी की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। आरोपी ने निचली अदालत से गबन के मामले में सुनाई गई एक साल के साधारण कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा के खिलाफ अपील की थी।
इंडियन बैंक के शाखा प्रबंधक ने आरोपी सुमित चौहान के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी थी। इसमें बताया था कि सुमित चौहान निवासी इंद्र विहार, कौलगढ़ रोड, देहरादून 24 अगस्त 2020 से 13 अगस्त 2021 तक बैंक की बागेश्वर शाखा में सहायक प्रबंधक के पद पर तैनात थे।
अपने कार्यकाल में उन्होंने शाखा में संचालित 12 सरकारी विभागों के खातों से 53,78,068 रुपये एनईएफटी/आटीजीएस के माध्यम से अपने संबंधियों ओर अन्य लोगों के नाम पर खोले गए खातों में भेजे थे। 26 अगस्त 2021 को बैंक की विभागीय जांच के दौरान इसका खुलासा होने पर उच्चाधिकारियों ने अभियुक्त से पूछताछ की और गबन की राशि जल्द जमा कराने को कहा गया।
बैंक ने वह राशि भी वसूल भी कर ली थी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट की न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह पेश कराए गए।
न्यायालय ने 21 मार्च 2025 को आरोपी को एक साल के साधारण कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर आरोपी को एक महीने के साधारण कारावास की सजा भाेगने का आदेश पारित किया।
अभियुक्त ने आदेश के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील की। सत्र न्यायाधीश ने मामले में दस्तावेजों व पत्रावली के अध्ययन के बाद अपील खारिज कर दी। निचली अदालत के निर्णय को सही पाते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में सजा भोगने के लिए जिला कारागार अल्मोड़ा भेजा।