पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बंद होने के बाद बैंकों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। एसबीआई को छोड़कर अन्य बैंकों में करेंसी का अभाव बना हुआ है। बैंकों में तनख्वाह और पेंशन के लिए आने वाले लोगों को कतार में खड़े होने के बाद महज चार हजार रुपए मिल पा रहे हैं। करेंसी की कमी के कारण कर्मचारी ही नहीं व्यापारी वर्ग भी खासा परेशान है। एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा और पीएनबी को छोड़कर अन्य बैंकों के एटीएम नोटबंदी से लेकर अभी तक बंद पड़े हैं।
दिसंबर के दूसरे दिन भी बैंकों में वेतनभोगियों और पेंशनरों की खासी भीड़ जुटी। ऐसा पहली बार हुआ जब कर्मचारियों को तनख्वाह और पेंशन के लिए कतार में खड़ा होना पड़ा। एसबीआई में कतार में खड़े पेंशनर मोहन सिंह और उमराव सिंह से जब बातचीत की तो उनका कहना था कि नोटबंदी का फैसला अच्छा है, लेकिन व्यवस्थाएं भी दुरुस्त होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहली बार पेंशन के लिए कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। बागेश्वर जिला मुख्यालय में एसबीआई, पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम से रुपए निकलने के कारण लोगों को काफी सहूलियत मिली, हालांकि सभी एटीएम से दो हजार रुपए के नोट ही निकले।
कांडा तहसील क्षेत्र के बैंकों में भी करेंसी का अभाव बना हुआ है। जिला अल्मोड़ा सहकारी बैंक की कांडा शाखा में 80 पेंशनर, 77 वेतनभोगी टीचर, 13 व्यवसायियों के खातों के अलावा 985 किसान क्रेडिट कार्डों के लेनदेन का काम भी होता है, परंतु सभी खाताधारकों को एक दिन में केवल चार हजार रुपए ही बैंक से मिल पा रहे हैं। दूर दराज ग्रामीण क्षेत्रों से बैंक आने वाले अधिकांश खाताधारकों का दो सौ से पांच सौ रुपए आने-जाने में ही व्यय हो जाता है। बैंक प्रबंधक नरेंद्र प्रसाद ने बताया कि बैंक को मांग के अनुरूप पैसा नहीं मिल पा रहा है। फिर भी सभी खाताधारकों को रुपए उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पुराने नोट जमा नहीं होने से किसान परेशान
कांडा। जिला सहकारी बैंक में पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों के जमा नहीं होने से किसान परेशान हैं। कई किसानों के खाते केवल सहकारी बैंक में ही हैं। ऐसे में पहले से बचाकर रखे पांच सौ और एक हजार के नोटों को लेकर ऐसे खाताधारक परेशान हैं। एक खाताधारक ने बताया कि उसके पास पांच सौ के नोट के पांच हजार रुपए हैं, परंतु सहकारी बैंक में पुराने नोट जमा नहीं हो रहे हैं। खाता धारकों का कहना है कि सरकार को इस संबंध में शीघ्र उचित व्यवस्था करनी चाहिए।