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Bageshwar News: कपकोट में आठ साल का बच्चा सरयू नदी में बहा

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बागेश्वर/कपकोट। श्रावण के पहले सोमवार को कपकोट शिवालय के पास से आठ साल का बालक सरयू नदी में बह गया। पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर सर्विस और आपदा प्रबंधन की टीम खोजबीन में जुटी है। अब तक उसका पता नहीं चल सका है।
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शिवालय में पूजा-अर्चना के लिए सुबह भक्तों की लाइन लगी थी। इसी दौरान शिवालय वार्ड के आणू में रहने वाली कमला देवी अपने पुत्र राकेश के साथ मंदिर आई थी। भगवान शिव की पूजा अर्चना करने के लिए वह सरयू नदी से जल लेने गईं। वह मंदिर की सीढि़यों पर बैठकर नदी से जल भर रहीं थी तभी बच्चा भी वहां पहुंच गया।
जल भरने के बाद कमला देवी रोली-चंदन को थाली में रख रही थीं तभी राकेश नदी से पानी भरने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह नदी के तेज बहाव में बह गया। आसपास के लोगों ने बच्चे को बहते देखा तो शोर मचाना शुरू कर दिया।
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मंदिर में पूजा करने आए रोशन गढि़या ने नदी में छलांग लगाकर उसे बचाने की कोशिश लेकिन तब तक वह काफी दूर बह चुका था। सूचना पर पुलिस-प्रशासन की रेस्क्यू टीमों ने मौके पर पहुंचकर खोजबीन शुरू की। विधायक सुरेश गढि़या भी सूचना पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित महिला को ढाढ़स बंधाया।
सीओ मनीष शर्मा ने बताया कि बच्चे की खोजबीन की जा रही है। बताया कि ड्रोन टीम की भी मदद ली जा रही है।
इसी साल अप्रैल में बच्चे के साथ आईं थी मां
राकेश कपकोट के एक निजी विद्यालय में कक्षा दो का छात्र है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि पहले वह अपने मामा के साथ भराड़ी में रहता था। इस साल अप्रैल में उसकी मां ने शिवालय के पास ही कमरा किराये पर लिया था जिसके बाद वह वहां रहने लगे। राकेश के पिता नारायण सिंह दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। राकेश की बड़ी बहन ममता गांव के स्कूल में हाईस्कूल की छात्रा है।

रोशन की जांबाजी से तेज निकली लहरों की रफ्तार
राकेश के बहने का शोर सुनकर मंदिर में पूजा करने आए रोशन गढि़या ने जांबाजी दिखाते हुए नदी में छलांग लगा दी। वह करीब 50 मीटर तक तैरकर गए लेकिन तब तक बच्चा बहाव में काफी आगे बह गया था। रोशन ने बताया कि उनके साथ एक बच्चे ने भी बचाने के लिए नदी में कूद मारी थी। नेपाली मूल का बताया जा रहा वह बच्चा कुशल तैराक है लेकिन भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर काफी अधिक था। तेज बहाव के कारण दोनों बालक को नहीं खोज पाए।

घटना के बाद बेसुध हुई मां
बेटे के बहने के बाद से मां कमला देवी बेसुध हो गई। लोगों ने उन्हें उठाकर कमरे तक पहुंचाया। जहां वह रोती बिलखती रहीं और बेहोश हो गईं। सूचना के बाद कपकोट पहुंंचे ससुर महेंद्र सिंह उन्हें सीएचसी ले गए। इलाज के बाद उन्हें लाहुर गांव लेकर चले गए।
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